🗞️ चर्चा में क्यों आज के विस्तृत लेख दो विषयों पर हैं: अरुणाचल प्रदेश में बांधों का विरोध, जहाँ द हिंदू की ख़बर के मुताबिक़ अपर सुबनसिरी में 26 अक्टूबर के बंद के दौरान हुई हिंसा के बाद प्रस्तावित मेंगा बांध पर होने वाली सुनवाई रद्द कर दी गई, और येरेवान में CBD COP-17, जहाँ भारत ने 27 अक्टूबर को जैव विविधता फ़्रेमवर्क लागू करने के लिए विकसित देशों से पर्याप्त और पूर्वानुमेय वित्त की माँग की। इनके साथ 27 अक्टूबर 2026 के समाचार-सार में ये विषय हैं: 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का संयुक्त घोषणापत्र, DPDP अधिनियम, 2023 को DNPA की चुनौती पर सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस, CEC को कैसे हटाया जा सकता है, इस पर ECI का हलफ़नामा, चक्रवात अर्णब पर IMD का ताज़ा पूर्वानुमान, ESTIC 2026 कॉन्क्लेव, गरुड़ शक्ति अभ्यास, महिलाओं की सुरक्षा पर NHRC की एडवाइज़री, यूनेस्को के डोपिंग-रोधी अभिसमय का COP10 ब्यूरो, सतर्कता जागरूकता सप्ताह, और डॉक्टरों की अनिवार्य ग्रामीण सेवा पर सर्वोच्च न्यायालय। अन्य समाचारों में: ब्रिटानिया के ख़िलाफ़ CCPA का आदेश, छह छंदों वाले वंदे मातरम् से जुड़ी याचिकाएँ, शिवसेना (UBT) की विलय से जुड़ी याचिका, के. आर. नारायणन की जयंती और पैदल सेना (इन्फैंट्री) दिवस।

12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम संयुक्त घोषणापत्र के साथ संपन्न

लोक सभा सचिवालय ने PIB के ज़रिए बताया कि 12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में “सर्वसम्मति से संयुक्त घोषणापत्र अपनाए जाने के साथ” संपन्न हुआ। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 26 अक्टूबर को इसका उद्घाटन किया था। फोरम का विषय था “Fostering Parliaments for People-Centric Development” (जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों का संवर्धन)।

  • संयुक्त राष्ट्र में सुधार: सदस्य संसदें “सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सुधार का समर्थन करती हैं”, ऐसा सुधार जो “उसे अधिक न्यायपूर्ण, समतापूर्ण, लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिमूलक, प्रभावी और कुशल बनाए”। घोषणापत्र में ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा 2026 के पैरा 13 में दिए गए कथन का स्वागत किया गया है।
  • आतंकवाद: “हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 26 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए।” पाठ आतंकवाद से निपटने की बात करता है, जिसमें “आतंकवादियों की सीमा-पार आवाजाही, आतंकवाद का वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहें” भी शामिल हैं। इसमें “आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता” का आह्वान है और “आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों” को ख़ारिज किया गया है।
  • इसके पीछे का शिखर सम्मेलन: घोषणापत्र में 12 और 13 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी के लिए भारत को बधाई दी गई है और नई दिल्ली नेताओं की घोषणा (New Delhi Leaders Declaration) को अपनाए जाने का स्वागत किया गया है।
  • आगे क्या: अध्यक्ष बिरला ने फोरम की अध्यक्षता चीन को सौंप दी, जो 2027 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता सँभालेगा; संसदें 2027 में चीन की अध्यक्षता में फिर मिलेंगी।

फोरम के आरंभ की ख़बर हमारे 26 अक्टूबर के समाचार-सार में थी।

📌 तथ्य सार

  • 12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम: नई दिल्ली, 26 और 27 अक्टूबर 2026; संयुक्त घोषणापत्र सर्वसम्मति से अपनाया गया।
  • विषय: “Fostering Parliaments for People-Centric Development”।
  • 2027: ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन के पास; फोरम उसी की अध्यक्षता में फिर मिलेगा।

DPDP अधिनियम, 2023 को DNPA की चुनौती पर सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस

LiveLaw के मुताबिक़, सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर 2026 को डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) की उस रिट याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें डिजिटल वैयक्तिक डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों को चुनौती दी गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिका पर और रोक (स्टे) के आवेदन पर नोटिस जारी किया, जो 17 नवंबर को वापसी-योग्य (returnable) है। DNPA में 21 प्रमुख समाचार संगठनों की डिजिटल शाखाएँ शामिल हैं, जिनमें द इंडियन एक्सप्रेस और द हिंदू भी हैं।

  • किसे चुनौती दी गई है: अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में अधिनियम की धाराओं 7, 17(2), 18, 19, 27, 29, 36, 37 और 44(3) को असंवैधानिक घोषित करने की माँग की गई है। इसमें DPDP नियमावली, 2025 के नियम 16, 17 और 23 को भी चुनौती दी गई है।
  • याचिकाकर्ताओं का पक्ष:
    • धारा 17(2) (छूट) शोध, अभिलेखन (archiving) और सांख्यिकीय प्रयोजनों के लिए होने वाले प्रसंस्करण को छूट देती है, पर पत्रकारिता को नहीं; याचिकाकर्ता इसे मनमाना बताते हैं।
    • याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि धारा 36 (सूचना माँगने की शक्ति), नियम 23 और नियमावली की सातवीं अनुसूची के साथ पढ़ने पर, केंद्र को डेटा फ़िड्युसरी और मध्यवर्तियों से सूचना माँगने देती है, और वह भी बिना न्यायिक निगरानी के, बिना आवश्यकता या आनुपातिकता की कसौटी के, और प्रभावित व्यक्ति को सूचना दिए बिना।
    • धारा 37(1) केंद्र को सूचना तक सार्वजनिक पहुँच रोकने की शक्ति देती है; याचिकाकर्ता इस शक्ति को बहुत व्यापक बताते हैं।
    • भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड (धाराएँ 18, 19 और 27) न्यायनिर्णयन की शक्तियों का प्रयोग करता है, लेकिन उसके अध्यक्ष और सदस्यों का चयन कार्यपालिका करती है और किसी न्यायिक सदस्य का होना ज़रूरी नहीं है।
    • धारा 44(3) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1) के खंड (ञ) की जगह “वैयक्तिक सूचना से संबंधित सूचना” रख देती है; याचिकाकर्ता इसे सूचना के प्रकटीकरण पर पूर्ण प्रतिबंध बताते हैं।
  • पीठ की टिप्पणी: CJI ने याचिकाकर्ताओं से कहा, “आप इस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं। संघ को और हमें यह सुझाने के लिए आप ही सबसे उपयुक्त हैं कि आप कैसे सुनिश्चित करेंगे कि कोई दुरुपयोग न हो”। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों के अधिकारों और मीडिया के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा।

न्यायालय ने अभी केवल नोटिस जारी किया है। उसने किसी प्रावधान पर रोक नहीं लगाई है और कोई निष्कर्ष नहीं दिया है; ऊपर दिया गया हर आधार याचिकाकर्ताओं का तर्क है। पृष्ठभूमि के लिए: न्यायमूर्ति के. एस. पुट्टस्वामी (सेवानिवृत्त) बनाम भारत संघ (24 अगस्त 2017) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना था कि निजता का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार के अभिन्न अंग के रूप में संरक्षित है। किसी डेटा उल्लंघन पर DPDP क़ानून कैसे लागू होता है, यह SBI डेटा उल्लंघन पर हमारे 25 अक्टूबर के संपादकीय विश्लेषण में समझाया गया है।

📌 तथ्य सार

  • DPDP अधिनियम, 2023: 2023 का अधिनियम संख्यांक 22, दिनांक 11 अगस्त 2023; धारा 18 भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड की स्थापना करती है।
  • DNPA की याचिका: अनुच्छेद 32 के तहत; नोटिस और रोक का आवेदन 17 नवंबर 2026 को वापसी-योग्य।
  • धारा 44(3): RTI अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(ञ) को प्रतिस्थापित करती है।

ECI का कहना: CEC को केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकता है; सुनवाई स्थगित

द हिंदू के मुताबिक़, भारत निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने सोमवार, 26 अक्टूबर की देर रात सर्वोच्च न्यायालय में एक संयुक्त जवाबी हलफ़नामा दाख़िल किया। लगभग 250 पन्नों के इस दस्तावेज़ में कहा गया है कि CEC को उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने पर लागू होते हैं, अन्यथा नहीं। LiveLaw के मुताबिक़, 27 अक्टूबर को CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई स्थगित कर दी, याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर दाख़िल करने के लिए 10 दिन दिए और मामले को अस्थायी रूप से 17 नवंबर को सूचीबद्ध किया।

  • याचिकाकर्ताओं का पक्ष: याचिकाओं में, जिनमें लोक सभा में विपक्ष के नेता और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका भी है, आरोप है कि ECI के कई फ़ैसले, जिनमें मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फ़ैसले भी शामिल हैं, “अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए”। ये याचिकाएँ द इंडियन एक्सप्रेस की उस ख़बर के बाद आईं जिसमें कहा गया था कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों की दर्ज आपत्तियों के बावजूद SIR पर “कम से कम 14 अहम फ़ैसले” लिए गए। मुख्य मामले, राकेश कुमार सिंह उर्फ़ राकेश सिंह बनाम भारत संघ एवं अन्य, में न्यायालय ने 5 अक्टूबर को नोटिस जारी किया था और CEC के निलंबन की माँग वाला एकपक्षीय अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था।
  • ECI का पक्ष: SIR पर सभी फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए; मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फ़ॉर्म 6 में कोई संशोधन नहीं हुआ; और अनुच्छेद 324(5) के आधार पर, CEC को काम करने से रोकने की माँग वाली याचिका सुनवाई-योग्य नहीं है। हलफ़नामे के मुताबिक़, जहाँ सदस्यों की राय अलग हो, वहाँ आयोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 18 के तहत बहुमत से फ़ैसला करता है।
  • संविधान का पाठ: अनुच्छेद 324(5) का पहला परंतुक कहता है कि CEC को “उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर ही हटाया जाएगा, जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, अन्यथा नहीं”। एक और परंतुक कहता है कि किसी अन्य निर्वाचन आयुक्त या प्रादेशिक आयुक्त को “मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफ़ारिश पर ही पद से हटाया जाएगा, अन्यथा नहीं”।

दोनों पक्षों की बातें एक लंबित मामले में दिए गए तर्क हैं; न्यायालय ने कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। पृष्ठभूमि के लिए देखें 2023 के अधिनियम पर विभाजित फ़ैसले पर हमारा 24 सितंबर का विस्तृत लेख (अंग्रेज़ी) और 8 अक्टूबर का समाचार-सार (अंग्रेज़ी), जिसमें उस फ़ैसले को वापस लेने की याचिका की ख़बर थी।

📌 तथ्य सार

  • अनुच्छेद 324(5), पहला परंतुक: CEC को केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिन पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को।
  • अन्य निर्वाचन आयुक्त: केवल CEC की सिफ़ारिश पर हटाए जा सकते हैं।
  • अगली तारीख़: याचिकाएँ अस्थायी रूप से 17 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध हैं।

चक्रवात अर्णब: आंध्र प्रदेश में रेड अलर्ट, 28 अक्टूबर को तट से टकराने की संभावना

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उसी दिन 1715 IST पर जारी अपने राष्ट्रीय बुलेटिन संख्या 19 में बताया कि 27 अक्टूबर को 1430 IST पर अत्यंत प्रचंड चक्रवाती तूफ़ान (Very Severe Cyclonic Storm) अर्णब बंगाल की खाड़ी के ऊपर 16.2° उत्तरी अक्षांश और 83.3° पूर्वी देशांतर के पास था। यह काकीनाडा से लगभग 140 किमी दक्षिण-पूर्व और विशाखापत्तनम से 170 किमी दक्षिण में था, और 18 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा था।

  • पूर्वानुमान: IMD के मुताबिक़, अर्णब के 28 अक्टूबर के पूर्वाह्न तक बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यानम के ठीक दक्षिण में, आंध्र प्रदेश और यानम के तटों को पार करने की बहुत संभावना है। तट पार करते समय इसके अत्यंत प्रचंड चक्रवाती तूफ़ान रहने और हवा की अधिकतम निरंतर गति 125-135 किमी प्रति घंटा, झोंकों में 150 किमी प्रति घंटा तक रहने की संभावना है। आंध्र प्रदेश और यानम तटों के लिए IMD की हवा संबंधी चेतावनी में 28 अक्टूबर को तड़के से पूर्वाह्न तक 135-145 किमी प्रति घंटा की हवा और 160 किमी प्रति घंटा तक के झोंकों की बात है।
  • महोर्मि और वर्षा: तट से टकराने के समय खगोलीय ज्वार से 1.5 से 2.5 मीटर ऊँची तूफ़ान महोर्मि से आंध्र प्रदेश के निचले इलाक़ों के जलमग्न होने की बहुत संभावना है, और महोर्मि का शिखर काकीनाडा और यानम (पुडुचेरी केंद्रशासित प्रदेश) के पास रहेगा। 27 और 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश में कहीं-कहीं 21 सेमी या उससे अधिक की अत्यधिक भारी वर्षा की बहुत संभावना है।
  • रेड अलर्ट: द हिंदू के मुताबिक़, IMD अमरावती ने 27 अक्टूबर के लिए आंध्र प्रदेश के 28 ज़िलों में से सात में रेड अलर्ट जारी किया: काकीनाडा, पूर्वी गोदावरी, डॉ. बी. आर. आंबेडकर कोनसीमा, एलुरु, पश्चिमी गोदावरी, अल्लूरी सीताराम राजू और अनकापल्ली।
  • तैयारियाँ: आंध्र प्रदेश के अधिकारियों ने बताया कि 4,711 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्रों में पहुँचाया जाएगा और 30,043 मछली पकड़ने वाली नावें बंदरगाहों पर लौट आई हैं; राज्य ने संभावित रूप से प्रभावित होने वाले ज़िलों में NDRF की सात और SDRF की आठ बटालियनें तैनात की हैं। द हिंदू के मुताबिक़, ओडिशा सरकार ने बताया कि मलकानगिरि, कोरापुट, नबरंगपुर, गजपति और रायगडा में 1,700 से अधिक आश्रय-स्थल तैयार हैं, और कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन के साथ वीडियो कॉन्फ़्रेंस के ज़रिए हुई समीक्षा बैठक के बाद राज्य के मुख्य सचिव ने मीडिया को जानकारी दी।
  • पूर्वानुमान में बदलाव: पहले के आँकड़े कम थे। हमारे विस्तृत लेख में उद्धृत 26 अक्टूबर के IMD बुलेटिन संख्या 11 में 115-125 किमी प्रति घंटा की हवा और 140 किमी प्रति घंटा तक के झोंके बताए गए थे। द हिंदू की 27 अक्टूबर की प्रिंट रिपोर्ट में 140 किमी प्रति घंटा के झोंकों और बुधवार, 28 अक्टूबर को दोपहर के आसपास यानम या काकीनाडा के पास तट पार करने की बात थी।

NCMC की समीक्षा और चक्रवातों का IMD वर्गीकरण हमारे 26 अक्टूबर के विस्तृत लेख में समझाया गया है।

📌 तथ्य सार

  • IMD राष्ट्रीय बुलेटिन संख्या 19 (1715 IST, 27 अक्टूबर 2026): 28 अक्टूबर के पूर्वाह्न तक बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट से टकराने की बहुत संभावना।
  • तट से टकराते समय का पूर्वानुमान: 125-135 किमी प्रति घंटा, झोंकों में 150 किमी प्रति घंटा तक; 1.5 से 2.5 मीटर की तूफ़ान महोर्मि।
  • 28 अक्टूबर की सुबह के लिए तटीय हवा की चेतावनी: 135-145 किमी प्रति घंटा, झोंकों में 160 किमी प्रति घंटा तक (IMD)।
  • यानम: पुडुचेरी केंद्रशासित प्रदेश का हिस्सा, आंध्र प्रदेश के तट पर।

भारत मंडपम में ESTIC 2026 शुरू, 27 से 29 अक्टूबर

उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कॉन्क्लेव (ESTIC) 2026 नई दिल्ली के भारत मंडपम में 27 से 29 अक्टूबर तक हो रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने 26 अक्टूबर को बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे इसका उद्घाटन करेंगे।

  • स्वरूप, जैसा PMO ने बताया: 12 विषयगत क्षेत्रों में विचार-विमर्श, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, जलवायु और महासागर विज्ञान शामिल हैं; लगभग 150 डीप-टेक स्टार्टअप स्टॉलों वाली एक प्रदर्शनी; और एक नया ग्लोबल कनेक्ट नेटवर्किंग इवेंट, जिसमें भारत और विदेश के शिक्षा जगत, शोध संस्थानों और उद्योग से 300 से अधिक आमंत्रित प्रतिभागी होंगे।
  • पहला दिन: PIB के मुताबिक़, 27 अक्टूबर को तंत्र और संश्लेषित जीवविज्ञान (System and Synthetic Biology) पर एक सत्र को संबोधित करते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने “जीन संश्लेषण में स्वदेशी प्रौद्योगिकीय क्षमताओं को मज़बूत करने” के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने SHANTI अधिनियम के उन प्रावधानों का ज़िक्र किया जो “नाभिकीय चिकित्सा अनुसंधान को निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोलते हैं”। DBT के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले ने भी सत्र में भाग लिया।

📌 तथ्य सार

  • ESTIC 2026: 27 से 29 अक्टूबर 2026, भारत मंडपम, नई दिल्ली; 12 विषयगत क्षेत्र।
  • प्रदर्शनी: लगभग 150 डीप-टेक स्टार्टअप स्टॉल; ग्लोबल कनेक्ट नेटवर्किंग इवेंट इस वर्ष नया है।

गरुड़ शक्ति: बान्युवांगी में भारत-इंडोनेशिया विशेष बल अभ्यास

रक्षा मंत्रालय ने 27 अक्टूबर को बताया कि भारत-इंडोनेशिया संयुक्त विशेष बल अभ्यास गरुड़ शक्ति का 11वाँ संस्करण बान्युवांगी, इंडोनेशिया में शुरू हो गया है और यह 27 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक चलेगा। भारतीय दल में पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) के जवान हैं, और इंडोनेशियाई दल में इंडोनेशियाई विशेष बलों के कर्मी।

  • प्रशिक्षण का केंद्र: “जंगल के वातावरण में विशेष अभियानों की रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाएँ, जिनमें बाधा पार करना, युद्धक निशानेबाज़ी, पर्वतारोहण, हवाई हमले का प्रशिक्षण और युद्ध के लिए कठोर बनाने वाले सत्र शामिल हैं”; साथ ही हथियारों, उपकरणों और अभियान संबंधी तौर-तरीक़ों पर विशेषज्ञता का आदान-प्रदान।
  • समापन: प्रशिक्षण का समापन एक सत्यापन अभ्यास से होगा, जिसमें वास्तविक अभियानों जैसी परिस्थितियाँ तैयार की जाएँगी।

📌 तथ्य सार

  • गरुड़ शक्ति: भारत-इंडोनेशिया संयुक्त विशेष बल अभ्यास; 11वाँ संस्करण बान्युवांगी में, 27 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026।
  • भारतीय दल: पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल); मुख्य ज़ोर जंगल वाले इलाक़े में विशेष अभियानों पर।

कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा पर NHRC की एडवाइज़री

PIB ने 27 अक्टूबर 2026 को बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने ‘कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा’ (Women’s Safety at Work and Public Spaces) पर एक एडवाइज़री जारी की है। यह दस केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, और सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को भेजी गई है। इन मंत्रालयों में महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, गृह, श्रम और रोज़गार, तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय शामिल हैं।

  • NHRC के आँकड़े: हाल के एक श्रम बल सर्वेक्षण का हवाला देते हुए NHRC कहता है कि सितंबर 2026 में श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी 34.6% थी, जबकि 2026 में प्रकाशित राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताज़ा रिपोर्ट में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के लगभग 4.4 लाख मामले दर्ज हुए।
  • आठ क्षेत्र: महिलाओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न पर जागरूकता, अवसंरचना, मौक़े पर मौजूद लोगों का हस्तक्षेप (bystander intervention), पुलिस की भूमिका, पीड़ितों की सहायता (survivor support), महिलाओं के विरुद्ध साइबर अपराध, दीर्घकालिक सुधार और अन्य उपाय।
  • आगे की कार्रवाई: NHRC ने अधिकारियों से अपनी सिफ़ारिशें लागू करने और दो महीने के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) देने को कहा है।

NHRC के कार्य मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 में गिनाए गए हैं। इनमें से एक है “मानव अधिकारों के संरक्षण के लिए संविधान या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन उपबंधित रक्षोपायों का पुनर्विलोकन करना और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उपायों की सिफ़ारिश करना”। एडवाइज़री में सिफ़ारिशें होती हैं; यह किसी अदालत का आदेश नहीं है।

📌 तथ्य सार

  • NHRC की एडवाइज़री (27 अक्टूबर 2026): आठ क्षेत्र; दो महीने के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट माँगी गई।
  • मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993: 1994 का अधिनियम संख्यांक 10; धारा 12 में आयोग के कार्य गिनाए गए हैं।

यूनेस्को डोपिंग-रोधी अभिसमय: नई दिल्ली में COP10 ब्यूरो की बैठक

PIB ने 27 अक्टूबर 2026 को बताया कि केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई दिल्ली में खेलों में डोपिंग के विरुद्ध यूनेस्को अंतरराष्ट्रीय अभिसमय के तहत COP10 ब्यूरो की तीसरी औपचारिक बैठक और 2026-27 के लिए फ़ंड की अनुमोदन समिति की चौथी औपचारिक बैठक की अध्यक्षता की।

  • भारत का क़ानून: मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय डोपिंग रोधी अधिनियम, 2022 और उसके 2025 के संशोधन ने, “जो दोनों जुलाई 2026 में लागू हुए”, भारत के ढाँचे को मज़बूत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार संसद के अगले सत्र में एक और संशोधन लाएगी, जो आपराधिक प्रावधान जोड़ेगा, जिनमें प्रशिक्षकों और आपूर्ति-शृंखला से जुड़े पक्षों के उल्लंघनों के लिए प्रावधान भी शामिल हैं; यह घोषित इरादा है।
  • मंत्री के आँकड़ों में NADA का रिकॉर्ड: 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) ने 7,000 से अधिक परीक्षण किए और 350 से अधिक शिक्षा और जागरूकता सत्र आयोजित किए, जिनसे 27,000 प्रतिभागियों तक पहुँच बनी।
  • कक्षा में: भारत में Sport Values in Every Classroom Toolkit (हर कक्षा में खेल के मूल्य) लागू करने के लिए युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और यूनेस्को के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने हैं; PIB ने इन हस्ताक्षरों को “आगामी” बताया है।
  • ब्यूरो: इसके अध्यक्ष अज़रबैजान के युवा और खेल मंत्री फ़रीद गयिबोव हैं; सचिव (खेल) हरि रंजन राव एक उपाध्यक्ष हैं, और भारत समूह IV का प्रतिनिधित्व करता है।

इस अभिसमय को यूनेस्को के सामान्य सम्मेलन ने 19 अक्टूबर 2005 को पेरिस में अपने 33वें सत्र में अपनाया था, और यह 1 फ़रवरी 2007 को लागू हुआ। इसमें जिस “संहिता” (Code) का उल्लेख है, वह विश्व डोपिंग रोधी संहिता है, जिसे विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी ने 5 मार्च 2003 को कोपेनहेगन में अपनाया था।

📌 तथ्य सार

  • खेलों में डोपिंग के विरुद्ध यूनेस्को अंतरराष्ट्रीय अभिसमय: 19 अक्टूबर 2005 को अपनाया गया; 1 फ़रवरी 2007 से लागू।
  • COP10 ब्यूरो में भारत: उपाध्यक्ष, समूह IV का प्रतिनिधित्व।
  • राष्ट्रीय डोपिंग रोधी अधिनियम, 2022, और उसका 2025 का संशोधन: मंत्री के अनुसार जुलाई 2026 से लागू।

सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026: “Probity for Prosperity”

PIB ने 27 अक्टूबर को बताया कि सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक “Probity for Prosperity” (समृद्धि के लिए सत्यनिष्ठा) विषय पर मनाया जा रहा है। नई दिल्ली के सतर्कता भवन में सुबह 11 बजे कार्यवाहक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त ए. एस. राजीव और सतर्कता आयुक्त प्रवीण वशिष्ठ ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के अधिकारियों और कर्मचारियों को सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञा दिलाई।

  • अभियान: आयोग ने केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और संगठनों को 17 अगस्त से 16 नवंबर 2026 तक तीन महीने का निवारक सतर्कता अभियान चलाने की सलाह दी है। इसका ज़ोर लंबित शिकायतों के निपटारे, लंबित मामलों के निपटारे, क्षमता निर्माण, डिजिटल पहलों और अनुबंध प्रबंधन पर है।
  • कार्यशाला: 30 अक्टूबर को “Transformation Through Technology” (प्रौद्योगिकी के ज़रिए रूपांतरण) विषय पर एक दिन की कार्यशाला होगी।
  • कार्यवाहक CVC: एशियानेट न्यूज़ेबल ने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की जिस अधिसूचना को उद्धृत किया है, उसके अनुसार सतर्कता आयुक्त ए. एस. राजीव प्रवीण कुमार श्रीवास्तव का कार्यकाल पूरा होने पर 3 अगस्त 2026 से कार्यवाहक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त हैं।

📌 तथ्य सार

  • सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026: 26 अक्टूबर से 1 नवंबर; विषय “Probity for Prosperity”।
  • CVC: ए. एस. राजीव, 3 अगस्त 2026 से कार्यवाहक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त; प्रवीण वशिष्ठ, सतर्कता आयुक्त।

डॉक्टरों की अनिवार्य ग्रामीण सेवा पर दिशानिर्देश तय करने की ओर सर्वोच्च न्यायालय का झुकाव

LiveLaw के मुताबिक़, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने 27 अक्टूबर 2026 को मौखिक रूप से ज़ाहिर किया कि उसका झुकाव देश भर में मेडिकल छात्रों की अनिवार्य ग्रामीण सेवा के लिए संवैधानिक सिद्धांतों पर आधारित दिशानिर्देश तय करने की ओर है।

  • मामला: यह रिट याचिका कर्नाटक की उस अधिसूचना के ख़िलाफ़ है जिसके तहत मेडिकल छात्रों को कर्नाटक मेडिकल काउंसिल में स्थायी पंजीकरण की पात्रता के लिए एक साल की अनिवार्य सार्वजनिक ग्रामीण सेवा पूरी करनी होती है। यह शर्त Karnataka Compulsory Service Training by Candidates Completed Medical Courses Act, 2012 (मेडिकल पाठ्यक्रम पूरा कर चुके अभ्यर्थियों के अनिवार्य सेवा प्रशिक्षण से जुड़ा कर्नाटक का अधिनियम) और उसकी 2015 की नियमावली के तहत है। 28 जुलाई 2023 की एक अधिसूचना ने यह शर्त निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों में निजी सीटों पर पढ़ने वाले छात्रों पर भी लागू कर दी।
  • संघ का पक्ष: अपर सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि स्नातकोत्तर छात्रों के लिए रोटेशन के आधार पर अनिवार्य सेवा की शर्त है, लेकिन स्नातक स्तर पर ऐसी कोई शर्त नहीं है; कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए कई राज्यों ने ऐसी सेवा के लिए बॉन्ड लागू किए हैं; और कि एक समिति ने सिफ़ारिश की है कि सभी राज्य ऐसे बॉन्ड एकसमान रूप से अपनाएँ।
  • न्याय मित्र (amicus): वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अनुच्छेद 21 और राज्य की नीति के निदेशक तत्वों के आधार पर, विधायी ख़ामियों को भरने के लिए दिशानिर्देश सुझाए।
  • पीठ: न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने “नीतिगत कमी” (policy deficit) की बात की और कहा, “जो सुझाया जा रहा है, वह कोई आदेश (mandate) नहीं है।” उन्होंने टिप्पणी की कि “स्वास्थ्य का अधिकार एक मौलिक अधिकार है”। न्यायालय अगले सप्ताह मामले की सुनवाई करेगा। उसने संघ से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उसका कोई नीति बनाने का इरादा है, और वह किससे परामर्श करेगा।

📌 तथ्य सार

  • कर्नाटक का क़ानून: Compulsory Service Training by Candidates Completed Medical Courses Act, 2012; नियमावली, 2015; 28 जुलाई 2023 को निजी सीटों पर भी लागू।
  • स्थिति: यह पीठ का मौखिक झुकाव है; कोई दिशानिर्देश तय नहीं किए गए हैं।

अन्य प्रमुख समाचार

  • “100% whole wheat bread” के दावे पर CCPA ने ब्रिटानिया पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया (आदेश 22 अक्टूबर का)। द हिंदू में 27 अक्टूबर को छपी PTI की ख़बर के मुताबिक़, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड पर एक भ्रामक विज्ञापन के लिए ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। विज्ञापन में “100% whole wheat bread” (शत-प्रतिशत साबुत गेहूँ की ब्रेड) का दावा था, जबकि उत्पाद में घोषित गेहूँ की मात्रा सिर्फ़ 62% है। LawStreet Journal के मुताबिक़, मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा ने स्वतः संज्ञान से शुरू हुई कार्यवाही में 22 अक्टूबर का आदेश पारित किया। इसमें CCPA ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर यह विज्ञापन तत्काल प्रभाव से बंद करे और 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाख़िल करे। उसी रिपोर्ट के अनुसार, आदेश Food Safety and Standards (Labelling and Display) Second Amendment Regulations, 2022 (लेबलिंग और प्रदर्शन से जुड़े खाद्य सुरक्षा और मानक विनियमों का दूसरा संशोधन) के विनियम 2.6 पर आधारित है। इस विनियम के तहत किसी ब्रेड को “Whole Wheat Bread” नाम देने के लिए उसमें कम से कम 75% साबुत गेहूँ का आटा होना ज़रूरी है। ब्रिटानिया की दलील थी कि “100%” का मतलब बिना मैदे वाला, बिना मिलावट का गेहूँ है, लेकिन CCPA ने माना कि यह अभिव्यक्ति पूरी संरचना का बोध कराती है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 21(2) के तहत किसी विनिर्माता या विज्ञापन का समर्थन करने वाले (endorser) पर जुर्माना ₹10 लाख तक हो सकता है, और हर बाद के उल्लंघन पर ₹50 लाख तक। हमारे 26 अक्टूबर के समाचार-सार में एक वॉकी-टॉकी विक्रेता के ख़िलाफ़ CCPA के एक अलग आदेश की ख़बर थी।
  • छह छंदों वाले वंदे मातरम् से जुड़े आदेशों के ख़िलाफ़ याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस (27 अक्टूबर)। LiveLaw के मुताबिक़, CJI सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दो याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया। इन याचिकाओं में केंद्र सरकार के 28 जनवरी और 9 जुलाई 2026 के उन आदेशों को चुनौती दी गई है, जो तय अवसरों पर गाने और बजाने के लिए ‘वंदे मातरम्’ का छह छंदों वाला संस्करण निर्धारित करते हैं। याचिकाकर्ताओं बी. डी. बोरकर और बालकृष्णन सत्यभामा मावोजी की दलील है कि इसे अनिवार्य करने से अनुच्छेद 25(1), 19(1)(क) और 21 का उल्लंघन होगा। उन्होंने अनुच्छेद 28(3) और अनुच्छेद 14 और 15 का भी हवाला दिया है, और बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य मामले का सहारा लिया है। ये याचिकाकर्ताओं की दलीलें हैं; न्यायालय ने केवल नोटिस जारी किया है। हमारा 2 अक्टूबर का संपादकीय विश्लेषण, “Two Songs and Their Nationalisms” (दो गीत और उनके राष्ट्रवाद) (अंग्रेज़ी) इसकी पृष्ठभूमि देता है।
  • सांसदों के विलय पर शिवसेना (UBT) की याचिका 8 दिसंबर को सूचीबद्ध (27 अक्टूबर)। LiveLaw के मुताबिक़, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद गणपत सावंत की याचिका को अंतिम निपटारे के लिए 8 दिसंबर को सूचीबद्ध किया। याचिका में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मान्यता दी गई थी। पीठ ने यह कदम यह दर्ज करने के बाद उठाया कि जुलाई में नोटिस जारी होने के बावजूद अध्यक्ष की ओर से कोई उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई। LiveLaw के अनुसार, विलय के बाद लोक सभा में UBT की संख्या घटकर तीन रह गई और शिंदे वाली शिवसेना की संख्या बढ़कर 13 हो गई। न्यायालय ने विलय पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।
  • के. आर. नारायणन की जयंती (27 अक्टूबर)। PIB के मुताबिक़, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 27 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति के. आर. नारायणन को उनकी जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति की वेबसाइट के अनुसार, कोचेरिल रामन नारायणन (27 अक्टूबर 1920 से 9 नवंबर 2005) 1992 से 1997 तक भारत के नौवें उपराष्ट्रपति और 1997 से 2002 तक भारत के दसवें राष्ट्रपति रहे।
  • पैदल सेना (इन्फैंट्री) दिवस, या शौर्य दिवस (27 अक्टूबर)। पैदल सेना दिवस हर साल 27 अक्टूबर को मनाया जाता है। 1947 में इसी दिन भारतीय सेना के पैदल सैनिक श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरने वाले पहले सैनिक थे। इसके बाद हुई कार्रवाइयों ने पाकिस्तान-समर्थित क़बायली आक्रमण को पीछे धकेला और भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की, जैसा कि PIB ने 2025 में पैदल सेना दिवस पर याद दिलाया था।

पिछले अंकों से

UPSC प्रासंगिकता

प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम का विषय आज का जुड़ाव
GS1 चक्रवात जैसी महत्वपूर्ण भूभौतिकीय घटनाएँ चक्रवात अर्णब का मार्ग और पूर्वानुमान
GS2 द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह ब्रिक्स संसदीय फोरम का संयुक्त घोषणापत्र
GS2 मौलिक अधिकार; न्यायपालिका की संरचना और कार्यप्रणाली DPDP अधिनियम को DNPA की चुनौती; वंदे मातरम् से जुड़ी याचिकाएँ; डॉक्टरों की ग्रामीण सेवा
GS2 संवैधानिक पदों पर नियुक्ति; निर्वाचन आयोग ECI का हलफ़नामा; अनुच्छेद 324(5)
GS2 सांविधिक, विनियामक और अर्ध-न्यायिक निकाय NHRC की एडवाइज़री; CCPA का आदेश; सतर्कता जागरूकता सप्ताह
GS2 संसद: कार्य-संचालन शिवसेना (UBT) के विलय से जुड़ी याचिका
GS2 स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे; कमज़ोर वर्ग ग्रामीण चिकित्सा सेवा; महिलाओं की सुरक्षा
GS3 आपदा और आपदा प्रबंधन आंध्र प्रदेश और ओडिशा में चक्रवात अर्णब की तैयारियाँ
GS3 विज्ञान और प्रौद्योगिकी: जैव प्रौद्योगिकी ESTIC 2026; जीन संश्लेषण
GS3 सुरक्षा बल; रक्षा सहयोग गरुड़ शक्ति अभ्यास
GS4 शासन में सत्यनिष्ठा सतर्कता जागरूकता सप्ताह, “Probity for Prosperity”

📌 तथ्य सार: ज्ञानकोश

प्रारंभिक परीक्षा: कथन-आधारित तथ्य:

  • 12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम: नई दिल्ली, 26 और 27 अक्टूबर 2026; संयुक्त घोषणापत्र सर्वसम्मति से; 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन के पास।
  • DPDP अधिनियम, 2023: 2023 का अधिनियम संख्यांक 22; धारा 18 भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड की स्थापना करती है; धारा 44(3) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(ञ) में संशोधन करती है।
  • पुट्टास्वामी (24 अगस्त 2017): निजता अनुच्छेद 21 के तहत प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न अंग है, और इसी रूप में संरक्षित है।
  • अनुच्छेद 324(5): CEC को केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकता है; अन्य निर्वाचन आयुक्तों को केवल CEC की सिफ़ारिश पर।
  • चक्रवात अर्णब: IMD के बुलेटिन संख्या 19 का पूर्वानुमान है कि यह 28 अक्टूबर के पूर्वाह्न तक बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट से टकराएगा।
  • ESTIC 2026: 27 से 29 अक्टूबर, भारत मंडपम; 12 विषयगत क्षेत्र; लगभग 150 डीप-टेक स्टार्टअप स्टॉल।
  • गरुड़ शक्ति: भारत-इंडोनेशिया विशेष बल; 11वाँ संस्करण, बान्युवांगी; पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल)।
  • मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993: धारा 12 में NHRC के कार्य गिनाए गए हैं।
  • यूनेस्को का डोपिंग-रोधी अभिसमय: 19 अक्टूबर 2005 को अपनाया गया, 1 फ़रवरी 2007 से लागू; COP10 ब्यूरो में भारत समूह IV की ओर से उपाध्यक्ष है।
  • सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026: 26 अक्टूबर से 1 नवंबर; “Probity for Prosperity”।
  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, धारा 21(2): विनिर्माता या endorser पर ₹10 लाख तक का जुर्माना, हर बाद के उल्लंघन पर ₹50 लाख।
  • के. आर. नारायणन: जन्म 27 अक्टूबर 1920; उपराष्ट्रपति 1992 से 1997; राष्ट्रपति 1997 से 2002।

प्रारंभिक परीक्षा: संभावित भ्रामक बिंदु:

  • नोटिस का मतलब रोक नहीं: DNPA, वंदे मातरम् और ECI के मामलों में न्यायालय ने नोटिस जारी किया है या सुनवाई स्थगित की है; किसी प्रावधान पर रोक नहीं लगी है और कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
  • CEC बनाम निर्वाचन आयुक्त: अनुच्छेद 324(5) में हटाए जाने से न्यायाधीश जैसी सुरक्षा CEC की है; किसी निर्वाचन आयुक्त को CEC की सिफ़ारिश पर हटाया जाता है।
  • तट से टकराना एक पूर्वानुमान है: चक्रवात अर्णब के 28 अक्टूबर को तट पार करने की “बहुत संभावना” है; हवा और महोर्मि के आँकड़े पूर्वानुमान हैं।
  • कार्यवाहक CVC: ए. एस. राजीव एक सतर्कता आयुक्त हैं; केंद्रीय सतर्कता आयुक्त का कार्यभार कार्यवाहक के रूप में उनके पास है।
  • ग्रामीण सेवा: सर्वोच्च न्यायालय ने केवल अपना झुकाव ज़ाहिर किया है; उसने कोई दिशानिर्देश तय नहीं किए हैं।
  • अधिनियम 1993 का, संख्यांक 1994 का: मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993, 1994 का अधिनियम संख्यांक 10 है।

मुख्य परीक्षा: तर्क और प्रमुख शब्दावली:

  • डेटा संरक्षण और प्रेस: पत्रकारिता के लिए छूट को पुट्टास्वामी में मान्यता पाए निजता के अधिकार के सामने तौलना; न्यायालय ने दुरुपयोग के विरुद्ध रक्षोपाय माँगे।
  • ECI की संस्थागत अखंडता: 2023 के अधिनियम की धारा 18 के तहत बहुमत से निर्णय बनाम एकतरफ़ा फ़ैसलों के आरोप; अनुच्छेद 324(5) में हटाए जाने से सुरक्षा।
  • आपदा की तैयारी: गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित जगह ले जाना, मछली पकड़ने वाली नावों की वापसी, NDRF और SDRF की तैनाती और आश्रय-स्थल दिखाते हैं कि ज़ोर अब पहले से कार्रवाई करने पर है।
  • ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यबल: बॉन्ड और अनिवार्य सेवा बनाम एकसमान राष्ट्रीय नीति; अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य का अधिकार।
  • महिलाओं का काम और सुरक्षा: श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी की एक शर्त के रूप में सुरक्षित कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थान।

साक्षात्कार: इनके लिए तैयार रहें:

  • “क्या डेटा संरक्षण क़ानून के तहत पत्रकारिता को छूट मिलनी चाहिए?” प्रेस की स्वतंत्रता और जनता के जानने के अधिकार को पुट्टास्वामी में मान्यता पाए निजता के अधिकार के सामने तौलिए, और दुरुपयोग रोकने के रक्षोपाय सुझाइए।
  • “क्या युवा डॉक्टरों के लिए ग्रामीण सेवा अनिवार्य होनी चाहिए?” ग्रामीण स्वास्थ्य की ज़रूरतों को छात्रों पर पड़ने वाली लागत के सामने तौलिए, और राज्य-दर-राज्य बॉन्ड के बजाय एकसमान नीति के पक्ष में तर्क दीजिए।

स्रोत: PIB, 27 अक्टूबर 2026 और PIB, 27 अक्टूबर 2026 (ब्रिक्स संसदीय फोरम और संयुक्त घोषणापत्र); LiveLaw, 27 अक्टूबर 2026, DPDP अधिनियम, 2023 (भारत का राजपत्र) और पुट्टास्वामी फ़ैसला (DNPA); LiveLaw, 27 अक्टूबर 2026, The Hindu, Delhi edition, 27 अक्टूबर 2026, और भारत का संविधान (ECI); IMD National Bulletin No. 19, 27 अक्टूबर 2026 और The Hindu, 27 अक्टूबर 2026 (चक्रवात अर्णब); PIB, 26 अक्टूबर 2026 और PIB, 27 अक्टूबर 2026 (ESTIC); PIB, 27 अक्टूबर 2026 (गरुड़ शक्ति); PIB, 27 अक्टूबर 2026 और मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (NHRC); PIB, 27 अक्टूबर 2026 और UNESCO (डोपिंग-रोधी); PIB, 27 अक्टूबर 2026, Asianet Newsable और Akashvani News (सतर्कता जागरूकता सप्ताह; CVC); LiveLaw, 27 अक्टूबर 2026 (ग्रामीण सेवा); The Hindu/PTI, 27 अक्टूबर 2026, LawStreet Journal, 23 अक्टूबर 2026 और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (ब्रिटानिया); LiveLaw, 27 अक्टूबर 2026 (वंदे मातरम्); LiveLaw, 27 अक्टूबर 2026 (शिवसेना); PIB, 27 अक्टूबर 2026 और भारत के राष्ट्रपति की वेबसाइट (के. आर. नारायणन); PIB, पैदल सेना दिवस 2025 (पैदल सेना दिवस)।

  • टिप्पणी: उद्धरण-चिह्नों में दिए गए विधिक और आधिकारिक अंश अंग्रेज़ी पाठ के हिंदी अनुवाद हैं।