🗞️ चर्चा में क्यों केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को आर्मेनिया के येरेवान में जैव विविधता अभिसमय (CBD) के पक्षकारों के 17वें सम्मेलन (COP-17) के उच्च-स्तरीय खंड (High-Level Segment) में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ़्रेमवर्क (KMGBF) को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए, और इसके लिए विकसित देशों से वित्त, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का सहारा मिलना चाहिए। सम्मेलन अभी जारी है: 26 अक्टूबर तक की रिपोर्टों के मुताबिक़ डिजिटल अनुक्रम सूचना (DSI), वित्त और संरक्षित क्षेत्रों से जुड़े पाठों पर बातचीत चल ही रही थी।
ख़बर यह वक्तव्य है; सम्मेलन अभी अपने मुख्य फ़ैसलों तक नहीं पहुँचा है। परीक्षा के लिहाज़ से यह सप्ताह तीन बातें पक्की करने का अच्छा मौक़ा है: KMGBF देशों से क्या माँगता है, कैली फ़ंड के ज़रिए DSI से होने वाले लाभों को कैसे बाँटा जाना है, और भारत ने वैश्विक फ़्रेमवर्क को राष्ट्रीय लक्ष्यों में कैसे ढाला है।
येरेवान में भारत ने क्या कहा
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने वक्तव्य का जो सार जारी किया, उसमें भारत के पाँच रुख़ दर्ज हैं। हर रुख़ जैव विविधता व्यवस्था के किसी ऐसे हिस्से से जुड़ता है जिसे अभ्यर्थी को जानना चाहिए।
| विषय | PIB के अनुसार मंत्री ने क्या कहा | किससे जुड़ता है |
|---|---|---|
| वित्त और राष्ट्रीय संदर्भ | KMGBF का कार्यान्वयन “राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, परिस्थितियों और विधान के अनुरूप होना चाहिए, और उसे विकसित देशों से पर्याप्त और पूर्वानुमेय वित्त, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का सहारा मिलना चाहिए” | KMGBF का लक्ष्य D, जो कार्यान्वयन के साधनों के बारे में है |
| डिजिटल अनुक्रम सूचना | “भारत कैली फ़ंड सहित बहुपक्षीय तंत्र के ज़रिए आनुवंशिक संसाधनों पर डिजिटल अनुक्रम सूचना से होने वाले लाभ-साझाकरण का भी समर्थन करता है” | कैली फ़ंड, जिसे COP-16 में निर्णय 16/2 से स्थापित किया गया |
| संश्लेषित जीवविज्ञान | उन्होंने “संश्लेषित जीवविज्ञान और जैव सुरक्षा के प्रति विज्ञान-आधारित, जोखिम के अनुपात में और एहतियाती दृष्टिकोण” की वकालत की | जैव सुरक्षा कार्टाजेना प्रोटोकॉल का विषय है |
| राष्ट्रीय योजना | भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) फ़्रेमवर्क को 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों और 142 संकेतकों में ढालती है | KMGBF के लक्ष्यों का भारत का राष्ट्रीय रूप |
| देश के भीतर लाभ-साझाकरण | भारत ने “अपने विधान को अभिसमय के अनुरूप बनाया है और विकेंद्रीकृत पहुँच और लाभ-साझाकरण के लिए ग्राम-स्तरीय समितियाँ स्थापित की हैं” | नागोया प्रोटोकॉल और जैव विविधता अधिनियम, 2002 |
मंत्री के आँकड़े. उन्होंने बैठक को बताया कि भारत में 1,134 संरक्षित क्षेत्र, 103 रामसर स्थल, 57 जैव विविधता विरासत स्थल और 18 जीवमंडल निचय (बायोस्फ़ीयर रिज़र्व) हैं; इन जीवमंडल निचयों में से 13 यूनेस्को के मानव और जीवमंडल (MAB) नेटवर्क में शामिल हैं। ये संख्याएँ वैसी ही हैं जैसी वक्तव्य में दी गईं।
उन्होंने जिन पहलों का ज़िक्र किया. अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (IBCA), जो दुनिया की सात बड़ी बिल्ली (बिग कैट) प्रजातियों और उनके पर्यावासों के संरक्षण के लिए है; मिशन LiFE और एक पेड़ माँ के नाम, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि ये जैव विविधता संरक्षण को “एक सामूहिक सामाजिक प्रयास” बनाते हैं; मैंग्रोव की बहाली के लिए तटरेखा पर्यावास और मूर्त आय के लिए मैंग्रोव पहल (MISHTI); आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए अमृत धरोहर; और सतत मृदा प्रबंधन के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना। अंत में उन्होंने कहा कि भारत “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” की भावना से KMGBF को आगे बढ़ाने के लिए सभी पक्षकारों के साथ काम करता रहेगा।
COP-17 की स्थिति: क्या अपनाया गया, क्या अब भी खुला है
CBD COP-17: क्या अपनाया गया, क्या अब भी खुला है, और भारत ने क्या कहा
26 अक्टूबर तक की रिपोर्टों के अनुसार सम्मेलन की स्थिति, और 27 अक्टूबर 2026 का भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य।
COP-17 येरेवान में 19 से 30 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है। इसके साथ ही कार्टाजेना प्रोटोकॉल के पक्षकारों की 12वीं बैठक (CP-MOP 12) और नागोया प्रोटोकॉल के पक्षकारों की छठी बैठक (NP-MOP 6) भी हो रही है। मंत्रिस्तरीय उच्च-स्तरीय खंड 27 और 28 अक्टूबर के लिए तय था। आगे का ब्योरा सोमवार, 26 अक्टूबर तक की उन दैनिक रिपोर्टों पर आधारित है जो इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IISD) का अर्थ नेगोशिएशन्स बुलेटिन (ENB) प्रकाशित करता है।
23 अक्टूबर तक क्या अपनाया गया
| बैठक | अपनाए गए निर्णय |
|---|---|
| COP-17 (CBD), प्रगति की समीक्षा (स्टॉकटेकिंग) वाला पूर्ण सत्र | लैंगिक कार्य योजना (Gender Plan of Action); क्लियरिंग-हाउस तंत्र; संचार, शिक्षा और जन-जागरूकता; आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (एक संशोधन के साथ अपनाया गया) |
| CP-MOP 12 (कार्टाजेना प्रोटोकॉल) | अनुपालन; दायित्व और निवारण पर नागोया-क्वालालंपुर पूरक प्रोटोकॉल; सामाजिक-आर्थिक पहलू; जैव सुरक्षा क्लियरिंग-हाउस; निगरानी और रिपोर्टिंग; LMO का पता लगाना और उनकी पहचान; वित्तीय तंत्र; राष्ट्रीय विधान और नई जैव प्रौद्योगिकी (एक पैराग्राफ़ हटाए जाने के बाद अपनाया गया) |
| NP-MOP 6 (नागोया प्रोटोकॉल) | अनुपालन; निगरानी और रिपोर्टिंग |
ये प्रक्रियात्मक और तकनीकी निर्णय हैं। इनमें से कोई भी निर्णय DSI, वित्त, वैश्विक समीक्षा या संरक्षित क्षेत्रों का मामला नहीं सुलझाता।
26 अक्टूबर को किन मुद्दों पर बातचीत जारी थी
- DSI और कैली फ़ंड. “सह-अध्यक्षों के मित्र” (Friends of the Co-Chairs) समूह “उस पाठ को हटाने पर सहमत हुआ जिसमें कहा गया था कि पक्षकारों को कैली फ़ंड से धन पाने के लिए प्रमाणपत्रों की मान्यता और आगे के लाभ-साझाकरण दावों से छूट अनिवार्य है”। कई विकासशील देशों का कहना था कि सिर्फ़ सहमति से तय सांकेतिक दरों पर किया गया मौद्रिक अंशदान ही उपयोगकर्ताओं को प्रमाणपत्र का हक़दार बनाता है। विकसित देशों ने इसका विरोध किया। उन्होंने इसके क़ानूनी दायरे को लेकर अनिश्चितता और उपयोगकर्ताओं के अंशदान को प्रोत्साहित करने की ज़रूरत का हवाला दिया।
- संसाधन जुटाना (resource mobilization), यानी वित्त से जुड़ी वार्ता. प्रतिनिधि कई मानदंडों पर सहमति तक नहीं पहुँचे। इनमें पात्र पक्षकारों के लिए वित्तीय संसाधन (जिनमें अल्पविकसित देशों और लघु द्वीपीय विकासशील देशों का उल्लेख है), देश का स्वामित्व और प्रत्यक्ष पहुँच, और स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों (IPLC), महिलाओं तथा युवाओं की भूमिका शामिल हैं। “सह-अध्यक्षों के मित्र” समूह में चर्चा जारी रही।
- संरक्षित क्षेत्र. संरक्षित क्षेत्रों पर कार्य कार्यक्रम को लेकर “मुख्य मतभेद बने रहे”: उन कर्ताओं की सूची पर जिन्हें वित्तीय और तकनीकी सहायता देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, मानवाधिकार-आधारित दृष्टिकोण पर, और सीखे गए सबक़ों पर एक संश्लेषण रिपोर्ट के अनुरोध पर।
- वैश्विक समीक्षा (Global Review), यानी KMGBF को लागू करने में हुई सामूहिक प्रगति की समीक्षा। संपर्क समूह समझौते वाली भाषा पर सहमत हुआ, जो “GBF के 2050 के लक्ष्य और विज़न हासिल न हो पाने के जोखिम पर चिंता के साथ ध्यान देती है”, अगर कार्रवाई और कार्यान्वयन के साधनों को तेज़ी से गति नहीं दी जाती। यह मसौदा पाठ है, अपनाया गया निर्णय नहीं।
DSI वार्ता में भारत
वक्तव्य की पृष्ठभूमि के तौर पर, 20 अक्टूबर के सत्र पर ENB की रिपोर्ट में दर्ज है कि भारत ने दक्षिण अफ़्रीका, इथियोपिया और वियतनाम के साथ मिलकर राष्ट्रीय ABS प्रणालियों और संप्रभु अधिकारों के सम्मान पर ज़ोर दिया। भारत ने यह भी कहा कि आवंटन पद्धति को अपनाने से पहले उस पर और तकनीकी काम की ज़रूरत है। ENB के “In the Corridors” स्तंभ ने, जो निर्णयों का रिकॉर्ड नहीं बल्कि एक टिप्पणी है, लिखा कि कैली फ़ंड को “अब तक जमा राशि के रूप में केवल USD 8,990 मिले हैं”, और एक प्रतिभागी के शब्द उद्धृत किए: “शायद कुछ मंत्रिस्तरीय दबाव की ज़रूरत पड़े।”
अगला COP. ENB के मुताबिक़ इक्वाडोर, इथियोपिया और पनामा ने COP-18 की मेज़बानी की पेशकश की थी; बाद में इथियोपिया ने अपनी पेशकश वापस ले ली और COP-19 की मेज़बानी में रुचि जताई। ये पेशकशें हैं, कोई निर्णय नहीं।
पृष्ठभूमि: KMGBF, कैली फ़ंड और भारत का NBSAP
कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ़्रेमवर्क
पृष्ठभूमि के तौर पर: KMGBF को 19 दिसंबर 2022 को निर्णय 15/4 के ज़रिए अपनाया गया था, जब कनाडा के मॉन्ट्रियल में COP-15 का दूसरा भाग (7 से 19 दिसंबर 2022) चल रहा था। इसमें 2050 के लिए 4 लक्ष्य (Goals) और 2030 के लिए 23 लक्ष्य (Targets) हैं।
| लक्ष्य (Goal) | 2050 तक यह क्या चाहता है (निर्णय के पाठ से, संक्षिप्त) |
|---|---|
| A | सभी पारितंत्रों की अखंडता, संयोजकता और लचीलापन बनाए रखा जाए, बढ़ाया जाए या बहाल किया जाए; ज्ञात संकटग्रस्त प्रजातियों का मानव-जनित विलोपन रोका जाए; आनुवंशिक विविधता बनाए रखी जाए |
| B | जैव विविधता का सतत उपयोग और प्रबंधन हो; लोगों के लिए प्रकृति के योगदान का मूल्य आँका जाए, उसे बनाए रखा जाए और बढ़ाया जाए |
| C | आनुवंशिक संसाधनों, DSI और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान से मिलने वाले मौद्रिक और ग़ैर-मौद्रिक लाभ उचित और न्यायसंगत ढंग से बाँटे जाएँ, जिनमें स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों के साथ बँटवारा भी शामिल है |
| D | कार्यान्वयन के पर्याप्त साधन (वित्त, क्षमता निर्माण, तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण) सुनिश्चित हों, और प्रति वर्ष $700 बिलियन का जैव विविधता वित्त अंतर क्रमशः पाटा जाए |
लक्ष्य 3, “भूमि, जल और समुद्र के 30% का संरक्षण”: 2030 तक स्थलीय और अंतर्देशीय जल क्षेत्रों के, और समुद्री तथा तटीय क्षेत्रों के, कम से कम 30 प्रतिशत हिस्से का संरक्षित क्षेत्रों की प्रणालियों और अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (OECM) के ज़रिए प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन होना है।
कैली फ़ंड
नवंबर 2024 में कोलंबिया के कैली में हुए COP-16 में अपनाए गए निर्णय 16/2 से आनुवंशिक संसाधनों पर डिजिटल अनुक्रम सूचना के उपयोग से होने वाले लाभों के उचित और न्यायसंगत बँटवारे के लिए कैली फ़ंड स्थापित किया गया। इसे DSI का व्यावसायिक उपयोग करने वाली निजी क्षेत्र की संस्थाओं से अंशदान मिलना है। निर्णय कहता है कि जहाँ उचित हो, और राष्ट्रीय परिस्थितियों तथा विधान के अधीन, इसकी धनराशि का कम से कम आधा हिस्सा स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों की स्वयं बताई गई ज़रूरतों पर ख़र्च होना चाहिए। फ़ंड का शुभारंभ फ़रवरी 2025 में रोम में हुआ, जब खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के मुख्यालय में COP-16 का पुनः आरंभ हुआ सत्र चल रहा था।
भारत का NBSAP
| तारीख़ | चरण |
|---|---|
| 10 सितंबर 2024 | भारत ने NBSAP के अंतर्गत अपने राष्ट्रीय लक्ष्य जमा किए |
| 30 अक्टूबर 2024 | पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कैली में COP-16 के दौरान अद्यतन NBSAP जारी किया |
| 31 अक्टूबर 2024 | भारत ने अद्यतन NBSAP को CBD पोर्टल पर जमा किया |
| 27 अक्टूबर 2026 | COP-17 में मंत्री ने NBSAP के लक्ष्य और संकेतक सामने रखे |
ये लक्ष्य प्रकृति की जिस स्थिति के जवाब में हैं, उसके लिए हमारा लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2026 पर लेख (अंग्रेज़ी) देखें; फ़्रेमवर्क की पहले की कवरेज के लिए देखें अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 2026 (अंग्रेज़ी)।
मुख्य परीक्षा की दृष्टि से: वित्त, संप्रभुता और लाभ-साझाकरण
महत्वाकांक्षा साधनों पर टिकी है. KMGBF का अपना लक्ष्य D 2050 के लक्ष्यों को वित्त, क्षमता और प्रौद्योगिकी से जोड़ता है, और हर साल $700 बिलियन के अंतर का नाम लेता है। विकसित देशों से पूर्वानुमेय वित्त की भारत की माँग दरअसल यह माँग है कि लक्ष्य D का सम्मान हो; यह कोई नई शर्त नहीं है। 26 अक्टूबर की संसाधन जुटाने वाली वार्ता में धन के आवंटन और प्रत्यक्ष पहुँच के मानदंडों पर अब तक सहमति नहीं बनी थी। इससे दिखता है कि इस माँग को कहाँ विरोध झेलना पड़ता है।
संप्रभुता और बहुपक्षीय तंत्र. DSI पर भारत ऐसे बहुपक्षीय तंत्र का समर्थन करता है जिसके केंद्र में कैली फ़ंड हो, और उसी वार्ता में उसने राष्ट्रीय ABS प्रणालियों और संप्रभु अधिकारों के सम्मान पर ज़ोर दिया। ये दोनों रुख़ तभी साथ चल सकते हैं जब फ़ंड से पैसा मिले और राष्ट्रीय क़ानून किनारे न किए जाएँ। प्रमाणपत्रों पर 26 अक्टूबर का विवाद इस बात पर था कि अंशदान करने वाले उपयोगकर्ता को बदले में क्या मिलता है: एक प्रमाणपत्र, और संभवतः आगे के लाभ-साझाकरण दावों से छूट।
देश के भीतर लाभ-साझाकरण. लक्ष्य C स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों के साथ उचित बँटवारे की माँग करता है, पारंपरिक ज्ञान के मामले में भी। भारत का जवाब जैव विविधता अधिनियम के स्थानीय स्तर में है, और उन ग्राम-स्तरीय समितियों में जिनका ज़िक्र मंत्री ने किया। नैतिक कसौटी, जो GS3 जितनी ही GS4 का भी विषय है, यह है: जिन समुदायों के पास आनुवंशिक संसाधनों का ज्ञान है, क्या उन्हें उस ज्ञान से होने वाली कमाई में हिस्सा मिलता है?
आगे क्या. सम्मेलन ख़त्म होने से पहले पक्षकारों को अभी DSI और कैली फ़ंड, संसाधन जुटाने, संरक्षित क्षेत्रों और वैश्विक समीक्षा पर फ़ैसला करना है। नज़र रखने लायक़ बातें ये हैं: कैली फ़ंड के प्रमाणपत्रों पर अंतिम शब्दावली, वित्त के लिए तय होने वाले मानदंड, और यह कि COP-18 के लिए मेज़बान चुना जाता है या नहीं।
आगे की राह
- DSI के नियम क़ानूनी निश्चितता के साथ तय हों. उपयोगकर्ताओं को पता होना चाहिए कि अंशदान के बदले उन्हें क्या मिलेगा, और प्रदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि राष्ट्रीय ABS क़ानून लागू रहेंगे।
- लक्ष्य D में बताए गए वित्त अंतर को पाटा जाए. विकसित देशों से आने वाला अंतरराष्ट्रीय वित्त और घरेलू ख़र्च, दोनों गिने जाते हैं; अकेले कोई भी इस अंतर को नहीं भर सकता।
- NBSAP के संकेतकों पर रिपोर्टिंग हो. राष्ट्रीय लक्ष्यों का महत्व तभी है जब प्रगति मापी और प्रकाशित की जाए।
- स्थानीय स्तर को मज़बूत किया जाए. जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ और ग्राम-स्तरीय ABS समितियाँ ही वह जगह हैं जहाँ लाभ-साझाकरण समुदायों तक पहुँचता है; उन्हें रिकॉर्ड, धन और प्रशिक्षित सदस्यों की ज़रूरत है।
- क्षेत्र-आधारित संरक्षण की गिनती ईमानदारी से हो. लक्ष्य 3 ऐसे क्षेत्र माँगता है जिनका प्रभावी संरक्षण हो और जिनका शासन न्यायसंगत हो, न कि केवल काग़ज़ पर अधिसूचित क्षेत्र।
UPSC प्रासंगिकता
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; जैव विविधता से जुड़े अभिसमय और भारत की राष्ट्रीय योजना।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2: महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच; भारत से जुड़े वैश्विक समझौते।
प्रारंभिक परीक्षा: CBD (1992) और उसके तीन उद्देश्य; कार्टाजेना और नागोया प्रोटोकॉल; KMGBF (उसके लक्ष्य, और लक्ष्य 3); कैली फ़ंड; भारत का NBSAP; राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण; IBCA, MISHTI और अमृत धरोहर।
मुख्य परीक्षा: “कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ़्रेमवर्क संरक्षण के लक्ष्यों को वित्त से, और आनुवंशिक संसाधनों से होने वाले लाभों के बँटवारे से जोड़ता है। भारत के रुख़ के संदर्भ में इसके कार्यान्वयन की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।” (GS3, 250 शब्द)
📌 तथ्य सार: ज्ञानकोश
प्रारंभिक परीक्षा: कथन-आधारित तथ्य:
- CBD COP-17: येरेवान, आर्मेनिया, 19 से 30 अक्टूबर 2026; साथ में CP-MOP 12 (कार्टाजेना) और NP-MOP 6 (नागोया)
- KMGBF: निर्णय 15/4, 19 दिसंबर 2022 को मॉन्ट्रियल में COP-15 (भाग II) में अपनाया गया; 2050 के लिए 4 लक्ष्य (Goals) और 2030 के लिए 23 लक्ष्य (Targets)
- KMGBF लक्ष्य 3: 2030 तक भूमि और अंतर्देशीय जल क्षेत्रों के, तथा समुद्री और तटीय क्षेत्रों के, कम से कम 30% हिस्से का प्रभावी संरक्षण
- KMGBF लक्ष्य D: कार्यान्वयन के साधन; प्रति वर्ष $700 बिलियन के जैव विविधता वित्त अंतर का उल्लेख
- कैली फ़ंड: COP-16 (नवंबर 2024) में निर्णय 16/2 से स्थापित; जहाँ उचित हो, इसकी धनराशि का कम से कम आधा हिस्सा स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों की मदद में लगना चाहिए
- कार्टाजेना प्रोटोकॉल (जैव सुरक्षा, LMO): 29 जनवरी 2000 को अपनाया गया; 11 सितंबर 2003 से लागू
- नागोया प्रोटोकॉल (पहुँच और लाभ-साझाकरण): 29 अक्टूबर 2010 को अपनाया गया; 12 अक्टूबर 2014 से लागू
- भारत का अद्यतन NBSAP: 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य और 142 संकेतक (जैसा COP-17 में बताया गया)
- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण: 2003 में गठित सांविधिक निकाय, चेन्नई; स्तर: NBA, राज्य जैव विविधता बोर्ड, BMC
- जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023: 2023 का अधिनियम संख्यांक 10; 3 अगस्त 2023 को अनुमति मिली
- COP-17 में बताई गई संख्याएँ: 1,134 संरक्षित क्षेत्र, 103 रामसर स्थल, 57 BHS, 18 जीवमंडल निचय (13 यूनेस्को MAB में)
प्रारंभिक परीक्षा: संभावित भ्रामक बिंदु:
- भारत का NBSAP 30 अक्टूबर 2024 को जारी हुआ और 31 अक्टूबर 2024 को CBD पोर्टल पर जमा किया गया: ये दो अलग-अलग दिन हैं
- कार्टाजेना जैव सुरक्षा (LMO) का प्रोटोकॉल है; नागोया पहुँच और लाभ-साझाकरण का प्रोटोकॉल है: दोनों को आपस में न बदलें
- 26 अक्टूबर तक की रिपोर्टों के अनुसार COP-17 ने केवल प्रक्रियात्मक और तकनीकी निर्णय अपनाए थे; DSI, वित्त या संरक्षित क्षेत्रों पर कुछ नहीं
- COP-18: इक्वाडोर, इथियोपिया और पनामा ने मेज़बानी की पेशकश की; इथियोपिया ने पेशकश वापस ली और COP-19 में रुचि जताई; ये पेशकशें हैं, निर्णय नहीं
- नाम के बावजूद KMGBF को COP-15 के भाग II में अपनाया गया था, जो कनाडा के मॉन्ट्रियल में हुआ
मुख्य परीक्षा: तर्क और प्रमुख शब्दावली:
- साधनों के बिना लक्ष्य विफल होते हैं: लक्ष्य D 2050 के लक्ष्यों को वित्त, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से जोड़ता है
- प्रमुख शब्द: कार्यान्वयन के साधन, डिजिटल अनुक्रम सूचना, बहुपक्षीय लाभ-साझाकरण, संप्रभु अधिकार, पहुँच और लाभ-साझाकरण, IPLC, OECM
साक्षात्कार: इनके लिए तैयार रहें:
- “क्या आनुवंशिक डेटा से मुनाफ़ा कमाने वाली कंपनियों को कैली फ़ंड में अंशदान करना चाहिए?” लक्ष्य C उचित बँटवारे की माँग करता है; अंशदान के नियम निश्चित होने चाहिए और राष्ट्रीय ABS क़ानूनों का सम्मान होना चाहिए।
स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB) (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय), CBD COP-17 में भारत के राष्ट्रीय वक्तव्य पर विज्ञप्ति, 27 अक्टूबर 2026। CBD सचिवालय, अधिसूचनाएँ 2025-096 (जुलाई 2025) और 2026-016 (जनवरी 2026)। Earth Negotiations Bulletin (IISD), COP 17 की दैनिक रिपोर्टें, 20 से 27 अक्टूबर 2026। CBD के निर्णय 15/4 (Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework) और 16/2 (Cali Fund); GBF और उसके लक्ष्यों, कैली फ़ंड के शुभारंभ (फ़रवरी 2025), कार्टाजेना और नागोया प्रोटोकॉल, तथा अभिसमय के अनुच्छेद 1 पर cbd.int के पृष्ठ। नवंबर और दिसंबर 2024 की PIB विज्ञप्तियाँ, और मंत्रालय की Year-end Review 2024। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण। भारत का राजपत्र, जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023।
- टिप्पणी: उद्धरण-चिह्नों में दिए गए विधिक और आधिकारिक अंश अंग्रेज़ी पाठ के हिंदी अनुवाद हैं।