उद्धरण-योग्य पंक्ति

“जब तक NMC के पास इन सभी कमियों के संतोषजनक उत्तर नहीं हैं, तब तक यह वापसी सरलीकरण कम और नियामक ढील ज़्यादा लगेगी।” (संपादकीय, द हिंदू, 27 अक्टूबर 2026)

यह संपादकीय आपकी परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है

चर्चा में: 27 अक्टूबर 2026 के अपने संपादकीय “Dubious retreat” (संदिग्ध पीछे हटना) में द हिंदू ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) की इस बात के लिए आलोचना की है कि उसने आयुर्विज्ञान शिक्षा के मानकों का अनुरक्षण विनियम, 2023 (Maintenance of Standards of Medical Education Regulations, MSMER) वापस ले लिए, और पूछा है कि उनकी जगह बची शक्तियों का इस्तेमाल हो भी रहा है या नहीं।

संदर्भ के लिए: NMC की विअधिसूचना (de-notification) पर 14 अक्टूबर 2026 की तारीख़ है, और यह 16 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित हुई, और प्रकाशन के साथ ही लागू हो गई। इस साइट पर ये लेख भी देखें: राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग (अंग्रेज़ी) (मार्च 2026) और NEET-UG 2026 (अंग्रेज़ी) (मई 2026)।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2: सामाजिक क्षेत्र की सेवाओं (स्वास्थ्य, शिक्षा) के विकास और प्रबंधन से जुड़े मुद्दे; सांविधिक, नियामक और अर्ध-न्यायिक निकाय; शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही।

60 शब्दों में सार

NMC ने मेडिकल कॉलेजों में मानक बनाए रखने से जुड़े अपने 2023 के विनियम रद्द कर दिए हैं, जिनके तहत वह झूठी जानकारी के लिए शिक्षकों और प्रशासकों पर व्यक्तिगत जुर्माना लगा सकता था। द हिंदू का कहना है कि केवल संस्थानों को दंडित करना कमज़ोर उपाय है, अपील की समय-सीमाएँ टकरा सकती हैं, और उसे संदेह है कि MARB के मूल्यांकन हो रहे हैं और प्रकाशित हो रहे हैं। वह चेताता है कि उत्तर न मिले तो यह सरलीकरण नियामक ढील जैसा लगेगा।

मुख्य तर्क: एक दृष्टि में

द हिंदू का तर्क है कि MSMER को पूरी तरह वापस लेकर NMC ने मेडिकल कॉलेजों के लिए दंड का ढाँचा कमज़ोर कर दिया है, ख़ासकर झूठी जानकारी पर व्यक्तिगत जुर्माने को, और NMC को दिखाना होगा कि जिन शक्तियों के कहीं और मौजूद होने की बात वह कहता है, उनका सचमुच इस्तेमाल होता है और उन्हें सार्वजनिक किया जाता है।

समर्थन में
  • MSMER के तहत नियामक उन शिक्षकों और प्रशासकों पर जुर्माना लगा सकता था जो झूठी जानकारी देते थे; यह ‘घोस्ट फ़ैकल्टी’ और ‘घोस्ट मरीज़ों’ पर एक अंकुश था। MARB विनियम केवल संस्थानों पर जुर्माना लगाते हैं।
  • संपादकीय के अनुसार केवल संस्थानों को दंडित करना ज़्यादा कठिन है, और इससे दंड देने के बजाय समझौता करने का उलटा प्रोत्साहन पैदा होने का ख़तरा है, जो उस डर को कमज़ोर करता है जो प्रशासकों को ईमानदार रखता है।
  • MARB विनियमों में अपील की समय-सीमा NMC अधिनियम में दी गई अवधि से कहीं छोटी है; संपादकीय के अनुसार यह अंतर क़ानूनी विवादों को जन्म दे सकता है, जिनसे दंडात्मक कार्रवाई में देरी हो।
  • संपादकीय सूचना के अधिकार (RTI) की एक कार्यवाही का हवाला देता है, जिसमें उसके अनुसार NMC ने 2024 में कहा था कि MARB ने मेडिकल कॉलेजों का न तो औपचारिक मूल्यांकन किया है और न उन्हें रेटिंग दी है, जबकि 2023 के MARB विनियम बोर्ड से अपने ताज़ा वार्षिक मूल्यांकन के नतीजे प्रकाशित करने की अपेक्षा करते हैं।
प्रतिवाद

मूल्यांकन के दो रास्तों के बजाय एक रास्ता बेहतर हो सकता है: NMC अधिनियम MARB को ही वह निकाय बनाता है जो संस्थानों का मूल्यांकन करता है, उन्हें रेटिंग देता है और दंडित करता है; वार्षिक प्रकटीकरण का दायित्व अधिनियम के तहत जारी है; लंबित मामले पुराने नियमों के तहत चलते रहेंगे; और NMC ने कहा कि उसका लक्ष्य एक-दूसरे पर चढ़ी नियामक प्रक्रियाओं को ख़त्म करना था।

आगे की राह

MARB अपने विनियमों के मुताबिक़ अपने मूल्यांकन और रेटिंग प्रकाशित करे; अपील की समय-सीमाएँ अधिनियम के अनुरूप की जाएँ; यह तय हो कि झूठे रिकॉर्ड दाख़िल करने वाले व्यक्तियों को जवाबदेह कैसे ठहराया जाएगा; और जब भी कोई विनियम वापस लिया जाए, उसके कारण बताए जाएँ।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

क्या वापस लिया गया

  • MSMER: 19 सितंबर 2023 को अधिसूचित और 21 सितंबर 2023 को राजपत्र में प्रकाशित, NMC अधिनियम की धारा 10, 24, 25 और 57 के तहत।
  • लागू होना: विअधिसूचना कहती है: “यह अधिसूचना राजपत्र में अपने प्रकाशन की तारीख़ से लागू होगी।”
  • क्या जारी रहेगा: “वार्षिक प्रकटीकरण रिपोर्ट (ADR) देने की अपेक्षा राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 की धारा 24(i) और 25(h) और समय-समय पर लागू विनियमों के अनुसार प्रभावी रहेगी।”
  • व्यावृत्ति खंड (saving clause): पुराने विनियमों के तहत की गई कार्रवाइयाँ, आदेश और अधिकार बने रहेंगे, और लंबित आवेदन, कार्यवाहियाँ और अपीलें उन्हीं के तहत चलती रहेंगी; विअधिसूचना के दिन या उसके बाद उठने वाला कोई भी मामला NMC अधिनियम और उस समय लागू प्रावधानों से संचालित होगा।
  • कारण: अधिसूचना में कोई कारण नहीं दिया गया। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने 23 अक्टूबर 2026 को ख़बर दी: “NMC का कहना है कि उसके फ़ैसले का मक़सद एक-दूसरे पर चढ़ी नियामक प्रक्रियाओं को ख़त्म करना है, और आयुर्विज्ञान मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (MARB) के पास संस्थानों के निरीक्षण, अनुपालन के सत्यापन और निर्धारित मानकों पर खरे न उतरने वाले कॉलेजों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का वैधानिक अधिकार बना रहेगा।”

MSMER में क्या प्रावधान था

MSMER के तहत हर चिकित्सा संस्थान को वार्षिक प्रकटीकरण रिपोर्ट दाख़िल करनी होती थी, और NMC के बोर्ड, अलग-अलग या मिलकर, उसकी सटीकता और सच्चाई का मूल्यांकन करवा सकते थे; संपादकीय इसी को “समानांतर व्यवस्था” कहता है। रिपोर्ट को लेकर किसी बोर्ड की माँगी गई जानकारी या दस्तावेज़ तय समय में न देना अननुपालन माना जाता था, जिस पर दंड लगता था। संस्थानों पर आर्थिक दंड के अलावा इसमें उस शिक्षक, विभागाध्यक्ष, डीन, निदेशक या डॉक्टर पर ₹5 लाख तक के दंड का प्रावधान था जिसने झूठी घोषणा, दस्तावेज़ या रिकॉर्ड (मरीज़ों के रिकॉर्ड समेत) जमा किए हों। दंड के ख़िलाफ़ साठ दिन के भीतर NMC के पास अपील हो सकती थी, और फिर केंद्र सरकार के पास।

क्या बचा है: MARB विनियम, 2023

नए चिकित्सा संस्थानों की स्थापना, मूल्यांकन और रेटिंग विनियम, 2023 (Establishment of New Medical Institutions, Assessment and Rating Regulations; यानी MARB विनियम) लागू रहेंगे। इनमें “चिकित्सा संस्थान के हर अननुपालन पर एक करोड़ रुपये से अनधिक आर्थिक दंड” का प्रावधान है। ये MARB से अपेक्षा करते हैं कि वह “मेडिकल कॉलेजों या चिकित्सा संस्थानों के ताज़ा वार्षिक मूल्यांकन के नतीजे और रेटिंग अपनी वेबसाइट पर या अन्यथा सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध कराए”। संस्थान अपनी अनिवार्य वार्षिक प्रकटीकरण रिपोर्ट UGMEB और/या PGMEB के पास दाख़िल करते हैं, और उसकी एक प्रति MARB को जाती है। MARB के आदेश के ख़िलाफ़ आयोग के पास अपील उस आदेश के “पंद्रह दिन के भीतर दाख़िल” करनी होती है, और उसके बाद तीस दिन के भीतर केंद्र सरकार के पास अगली अपील हो सकती है।

सुधार (27 अक्टूबर 2026): इस लेख के अंग्रेज़ी संस्करण में पहले 2023 के MARB विनियमों का शीर्षक “New” शब्द के बिना छपा था। विनियम का सही शीर्षक Establishment of New Medical Institutions, Assessment and Rating Regulations, 2023 है।

अधिनियम क्या कहता है

NMC अधिनियम के तहत MARB के कामों में शामिल है “चिकित्सा संस्थानों के मूल्यांकन और रेटिंग को नियमित अंतराल पर अपनी वेबसाइट पर या सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध कराना” और “चेतावनी जारी करना, आर्थिक दंड अधिरोपित करना, प्रवेश क्षमता घटाना या प्रवेश रोकना और मान्यता वापस लेने के लिए आयोग से सिफ़ारिश करना” (धारा 26)। किसी बोर्ड के फ़ैसले से असंतुष्ट व्यक्ति “ऐसे फ़ैसले की सूचना मिलने के साठ दिन के भीतर उसके ख़िलाफ़ आयोग के पास अपील कर सकता है” (धारा 22(3))। पारदर्शिता पर पहले भी विवाद हो चुका है: Careers360 की ख़बर के मुताबिक़, जुलाई 2024 में केंद्रीय सूचना आयोग ने NMC से “एक बार फिर कहा” कि वह सभी मेडिकल कॉलेजों की मूल्यांकन रिपोर्टें 30 दिन के भीतर अपने पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड करे।

विश्लेषण

संपादकीय पाँच बिंदु उठाता है।

1. दंड का कमज़ोर ढाँचा। संपादकीय के अनुसार यह वापसी आख़िरकार “मेडिकल कॉलेजों में शैक्षिक मानकों और बुनियादी ढाँचे के संदर्भ में दंड के ढाँचे को कमज़ोर” करती है, क्योंकि MSMER झूठी जानकारी देने पर शिक्षकों और प्रशासकों पर जुर्माना लगाते थे। विनियम का पाठ इसकी पुष्टि करता है (उसमें शिक्षक, विभागाध्यक्ष, डीन, निदेशक और डॉक्टर का नाम है)। संपादकीय आगे कहता है कि MSMER की “मेडिकल कॉलेजों में गहरी जड़ें जमा चुके भ्रष्टाचार और कदाचार, ख़ासकर ‘घोस्ट फ़ैकल्टी’ और ‘घोस्ट मरीज़ों’ पर शिकंजा कसने के इरादे के लिए सराहना हुई थी”।

2. कारण बताया गया, दायरा अस्पष्ट। संपादकीय के शब्दों में, “NMC का तर्क यह है कि MSMER ने एक समानांतर व्यवस्था भी शुरू की थी, जिससे स्नातक और स्नातकोत्तर बोर्ड संस्थानों का मूल्यांकन कर सकते थे, और यह MARB के काम में दख़ल था।” रिकॉर्ड पर इकलौता घोषित लक्ष्य वही है जिसकी ख़बर बिज़नेस स्टैंडर्ड ने दी, यानी “एक-दूसरे पर चढ़ी नियामक प्रक्रियाओं को ख़त्म करना”। संपादकीय का कहना है कि दोहराव को मान भी लें, तो “NMC ने MSMER को पूरी तरह क्यों रद्द किया, यह स्पष्ट नहीं है”। वह यह भी बताता है कि उसके अनुसार 2023 के स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा विनियम “लागू हैं और उनमें स्नातकोत्तर मेडिकल कॉलेजों के शिक्षकों पर व्यक्तिगत रूप से जुर्माना लगाने का प्रावधान है”, यानी व्यक्तिगत जुर्माने अब केवल स्नातकोत्तर केंद्रों पर बचे हैं।

3. केवल संस्थान। उन केंद्रों के बाहर, “MARB और NMC केवल संस्थानों को दंडित कर सकते हैं, जो ज़्यादा कठिन है और जिससे दंड देने के बजाय समझौता करने का उलटा प्रोत्साहन पैदा होने का ख़तरा है”। किसी कॉलेज पर जुर्माने या उसकी प्रवेश क्षमता में कटौती का बोझ संस्थान और उसके छात्रों पर पड़ता है; व्यक्तिगत जुर्माना उस व्यक्ति पर पड़ता था जिसने झूठे रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर किए। संपादकीय का तर्क है कि यही “वह डर है जो प्रशासकों को ईमानदार रखता है”।

4. अपील की दो घड़ियाँ। MARB विनियमों में अपील की प्रक्रिया बनी हुई है, लेकिन उनकी पंद्रह दिन की समय-सीमा “NMC अधिनियम के तहत 60 दिन की अवधि से टकरा सकती है, जिससे ऐसे क़ानूनी विवाद पैदा हो सकते हैं जो दंडात्मक कार्रवाई में देरी करें”। दोनों पाठों में अंतर सचमुच है; क़ानून की नज़र में यह टकराव है या नहीं, यह संपादकीय की अपनी व्याख्या है।

5. काग़ज़ पर शक्तियाँ, नतीजे ओझल। संपादकीय अपने आख़िरी बिंदु को “एक बहुत कुछ कहने वाली घटना” बताता है: उसके अनुसार सूचना के अधिकार (RTI) की एक कार्यवाही में “केंद्रीय सूचना आयोग ने पिछले साल बताया कि NMC ने 2024 में कहा था कि MARB ने मेडिकल कॉलेजों का न तो औपचारिक मूल्यांकन किया है और न उन्हें रेटिंग दी है, और उसके मानक प्रपत्रों को सार्वजनिक करने की ज़रूरत नहीं है”, और अक्टूबर 2025 के एक संशोधित उत्तर में कहा गया कि जवाब देने वाले अधिकारी के रिकॉर्ड में संबंधित रिपोर्टों में से कोई भी नहीं है। फिर भी MARB विनियम बोर्ड से अपने ताज़ा वार्षिक मूल्यांकन के नतीजे प्रकाशित करने की अपेक्षा करते हैं। इसीलिए संपादकीय की माँग है: “जनता को यह जानने का हक़ है कि क्या इन शक्तियों का इस्तेमाल भी हो रहा है और क्या नतीजे उतने ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं जितना इरादा था।”

आँकड़े और संस्थाएँ

प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य:

वापसी:

  • MSMER 2023: 19 सितंबर 2023 को अधिसूचित; 21 सितंबर 2023 को राजपत्र में प्रकाशित।
  • NMC की 14 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना से विअधिसूचित; 16 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित; प्रकाशन के साथ लागू।
  • वार्षिक प्रकटीकरण रिपोर्ट NMC अधिनियम की धारा 24(i) और 25(h) के तहत जारी है।

दंड और अपीलें:

  • MSMER (वापस लिए गए): झूठी घोषणाओं या रिकॉर्ड के लिए शिक्षक, विभागाध्यक्ष, डीन, निदेशक या डॉक्टर पर ₹5 लाख तक।
  • MARB विनियम, 2023 (राजपत्र में प्रकाशन 2 जून 2023): किसी संस्थान के हर अननुपालन पर ₹1 करोड़ तक।
  • MARB के ख़िलाफ़ आयोग के पास अपील: 15 दिन के भीतर (MARB विनियम); अधिनियम के तहत किसी बोर्ड के फ़ैसले के ख़िलाफ़: 60 दिन (धारा 22(3))।
  • दूसरी अपील: केंद्र सरकार के पास, 30 दिन के भीतर (MARB विनियम)।

अधिनियम:

  • NMC अधिनियम, 2019: 2019 का अधिनियम संख्यांक 30; भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम, 1956 का निरसन किया; MCI को भंग किया।
  • चार बोर्ड (धारा 16): UGMEB, PGMEB, MARB, EMRB।
  • MARB (धारा 26): मूल्यांकन और रेटिंग प्रकाशित करता है; चेतावनी दे सकता है, जुर्माना लगा सकता है, प्रवेश क्षमता घटा सकता है, प्रवेश रोक सकता है, मान्यता वापस लेने की सिफ़ारिश कर सकता है।
  • NEET धारा 14 के तहत; NExT धारा 15 के तहत।

⚠️ संभावित भ्रामक बिंदु: संस्थानों पर जुर्माना MARB विनियमों के तहत बना हुआ है; जो ख़त्म हुआ वह MSMER का व्यक्तिगत जुर्माना है। वापसी की तारीख़ राजपत्र में उसके प्रकाशन से गिनें, यानी जिस दिन वह लागू हुई, न कि अधिसूचना पर छपी तारीख़ से। अधिनियम के तहत कॉलेजों का मूल्यांकन और रेटिंग MARB करता है, शिक्षा बोर्ड नहीं।

वाद-विवाद

संपादकीय के पक्ष में। झूठे हस्ताक्षरित रिकॉर्ड के ख़िलाफ़ व्यक्तिगत जुर्माना सबसे धारदार निवारक है, और वह सीधे उस व्यक्ति तक पहुँचता था जिसने हस्ताक्षर किए। कॉलेज पर जुर्माना, उसकी सीटें घटाना या दाख़िले रोकना प्रबंधन के साथ छात्रों को भी सज़ा देता है, और इसीलिए नियामक इन उपायों के इस्तेमाल से हिचक सकते हैं। और जिस शक्ति का इस्तेमाल होता न दिखे, उससे कोई नहीं डरता: MARB विनियम मूल्यांकन के नतीजे प्रकाशित करने की अपेक्षा करते हैं, और CIC को एक से ज़्यादा बार NMC से मूल्यांकन रिपोर्टें अपलोड करने को कहना पड़ा है।

दूसरा पक्ष। दोहराव की अपनी क़ीमत होती है। MSMER के तहत NMC का कोई भी बोर्ड, अलग से या मिलकर, किसी प्रकटीकरण रिपोर्ट का मूल्यांकन करवा सकता था, जबकि अधिनियम मूल्यांकन, रेटिंग और दंड के लिए MARB को ज़िम्मेदार निकाय बनाता है; दो रास्तों का मतलब दोहरी जाँच और परस्पर विरोधी निष्कर्ष हो सकता है। वापसी सबसे ज़रूरी चीज़ें बचाए रखती है: प्रकटीकरण का दायित्व अधिनियम में बना हुआ है, लंबित कार्यवाहियाँ जारी हैं, संस्थागत जुर्माना बना हुआ है, और अधिनियम डॉक्टरों के पेशेवर आचरण का ज़िम्मा आचार और आयुर्विज्ञान रजिस्ट्रीकरण बोर्ड के पास रखता है। किसी विनियम को वापस लेने से कोई वैधानिक शक्ति निरस्त नहीं हो जाती।

संतुलित निष्कर्ष। NMC का यह कहना सही हो सकता है कि मूल्यांकन के दो रास्तों से एक रास्ता बेहतर है। लेकिन जो सफ़ाई इकलौते सामान्य व्यक्तिगत दंड को ही हटा दे, उसके साथ कारण और कोई विकल्प भी आना चाहिए, और संपादकीय ने जो कसौटी रखी है वह उचित है: क्या MARB के मूल्यांकन हो रहे हैं, प्रकाशित हो रहे हैं और लागू हो रहे हैं? इसकी जाँच तभी हो सकती है जब वे प्रकाशित हों।

इस विषय पर कैसे सोचें

जब भी कोई नियामक कोई नियम हटाए, एक “वापसी की कसौटी” (withdrawal test) अपनाएँ:

  1. ठीक-ठीक क्या जा रहा है? यहाँ: व्यक्तिगत जुर्माने, दूसरे बोर्डों द्वारा मूल्यांकन, MSMER का अपना अपील-मार्ग।
  2. क्या बचता है, और किस स्तर पर? अधिनियम में या विनियम में? (यहाँ: प्रकटीकरण का दायित्व अधिनियम में; MARB की वैधानिक शक्तियाँ और उसके 2023 के विनियम।)
  3. क्या बची हुई शक्ति का इस्तेमाल होता है? प्रकाशित मूल्यांकन, रेटिंग और दंड आदेश खोजें।
  4. क्या टुकड़े आपस में मेल खाते हैं? विनियमों और अधिनियम में समय-सीमाओं और प्रक्रियाओं की तुलना करें।
  5. क्या कारण बताए गए? अधिसूचना में कोई कारण नहीं है; ख़बरों में बताया गया लक्ष्य दर्ज किया गया कारण नहीं होता।

फिर तथ्य को तर्क से अलग करें: तारीख़ें, धाराएँ और दंड की ऊपरी सीमाएँ राजपत्र के पाठों और अधिनियम से आती हैं; ‘घोस्ट फ़ैकल्टी’, ‘उलटा प्रोत्साहन’ और RTI प्रकरण संपादकीय का अपना विवरण हैं।

आरेख में समझें

तर्क मानचित्र

MSMER की वापसी: क्या गया, क्या बचा

NMC ने अपने 2023 के विनियम विअधिसूचित किए; द हिंदू का संपादकीय पूछता है कि जो शक्तियाँ बची हैं, उनका इस्तेमाल होता है या नहीं।

MSMER 2023 विअधिसूचित NMC द्वारा; भारत के राजपत्र में प्रकाशन के साथ लागू MSMER के साथ गया झूठी घोषणाओं या रिकॉर्ड के लिए शिक्षक, विभागाध्यक्ष, डीन, निदेशक या डॉक्टर पर ₹5 लाख तक के जुर्माने; प्रकटीकरण रिपोर्टों का बोर्डों द्वारा मूल्यांकन (संपादकीय की "समानांतर व्यवस्था") बचा रहा MARB विनियम, 2023: किसी संस्थान के हर अननुपालन पर ₹1 करोड़ तक; NMC अधिनियम के तहत वार्षिक प्रकटीकरण; पुराने नियमों के तहत लंबित मामले क्या गया, क्या बचा PG केंद्रों के बाहर केवल संस्थान 2023 के PG विनियम अब भी PG कॉलेजों में शिक्षकों पर जुर्माने की अनुमति देते हैं; बाक़ी जगह केवल संस्थानों को दंडित किया जा सकता है: यह ज़्यादा कठिन है, और दंड देने के बजाय समझौता करने का उलटा प्रोत्साहन अपील की दो घड़ियाँ MARB विनियमों की समय-सीमा अधिनियम से छोटी है; संपादकीय के अनुसार दोनों टकरा सकती हैं संपादकीय की चिंताएँ क्या शक्तियों का इस्तेमाल होता है? क्या उनका इस्तेमाल हो रहा है, और क्या नतीजे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं? जब तक NMC के पास सभी कमियों के संतोषजनक उत्तर नहीं हैं, तब तक यह वापसी सरलीकरण कम और नियामक ढील ज़्यादा लगेगी संपादकीय की कसौटी
वापसी से क्या हटता है और क्या बचता है, संपादकीय की दो चिंताएँ, और NMC के लिए उसकी रखी कसौटी।

ऊपर से पढ़ें: दूसरी पंक्ति में बायाँ बॉक्स बताता है कि वापसी से क्या हटता है, और दायाँ बॉक्स कि क्या बचता है। नीचे की पंक्तियाँ संपादकीय की चिंताएँ और NMC के लिए उसकी रखी कसौटी दिखाती हैं।

✍️मुख्य परीक्षा: उत्तर का ढाँचा
प्रश्न

चिकित्सा शिक्षा के प्रभावी विनियमन के लिए निवारण और पारदर्शिता, दोनों ज़रूरी हैं। आयुर्विज्ञान शिक्षा के मानकों का अनुरक्षण विनियम, 2023 की वापसी के आलोक में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 के तहत मेडिकल कॉलेजों के नियामक ढाँचे की पर्याप्तता का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम, 2019 ने भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद की जगह एक आयोग और चार स्वायत्त बोर्ड बनाए, जिनमें आयुर्विज्ञान मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (MARB) भी है। अक्टूबर 2026 में आयोग ने आयुर्विज्ञान शिक्षा के मानकों का अनुरक्षण विनियम, 2023 (MSMER) विअधिसूचित कर दिए, जो झूठे वार्षिक प्रकटीकरण पर संस्थानों और व्यक्तियों, दोनों को दंडित करते थे। यह बदलाव प्रक्रिया को सुसंगत बनाता है, लेकिन निवारण और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।

क्या बचा है। वार्षिक प्रकटीकरण रिपोर्ट दाख़िल करने का दायित्व अधिनियम की धारा 24(i) और 25(h) के तहत जारी है। धारा 26 के तहत MARB चेतावनी दे सकता है, आर्थिक दंड लगा सकता है, प्रवेश क्षमता घटा सकता है, दाख़िले रोक सकता है और मान्यता वापस लेने की सिफ़ारिश कर सकता है, और उसके 2023 के विनियम किसी संस्थान के हर अननुपालन पर ₹1 करोड़ तक के दंड की अनुमति देते हैं। MSMER के तहत लंबित मामले उसी के तहत चलते रहेंगे। वापसी के पक्ष में तर्क सुसंगति का है: एक ही रिपोर्ट को दूसरे बोर्ड भी जाँचें, इसके बजाय मूल्यांकन के लिए एक वैधानिक बोर्ड हो; आयोग का घोषित लक्ष्य एक-दूसरे पर चढ़ी नियामक प्रक्रियाओं को ख़त्म करना है। क्या खोया। MSMER झूठी घोषणाएँ या रिकॉर्ड जमा करने वाले शिक्षकों, विभागाध्यक्षों, डीन, निदेशकों या डॉक्टरों पर ₹5 लाख तक के जुर्माने की अनुमति देते थे, जो ‘घोस्ट फ़ैकल्टी’ के ख़िलाफ़ सीधा निवारक था। केवल संस्थानों को दंडित करना धीमा है, और चूँकि प्रवेश क्षमता में कटौती से छात्रों को नुक़सान हो सकता है, इससे समझौते को बढ़ावा मिल सकता है। MARB के ख़िलाफ़ अपील अब उसके विनियमों के तहत 15 दिन के भीतर करनी होती है, जबकि अधिनियम की धारा 22(3) में 60 दिन हैं; यह बेमेल मुक़दमेबाज़ी को न्योता दे सकता है। पारदर्शिता असमान है: MARB के विनियम उससे वार्षिक मूल्यांकन के नतीजे और रेटिंग प्रकाशित करने की अपेक्षा करते हैं, और केंद्रीय सूचना आयोग ने एक से ज़्यादा बार आयोग को मेडिकल कॉलेजों की मूल्यांकन रिपोर्टें अपलोड करने का निर्देश दिया है।

दोहराव हटाना तभी ठीक है जब बची हुई शक्तियों का इस्तेमाल हो और इस्तेमाल होता दिखे भी। आयोग को MARB के मूल्यांकन और रेटिंग प्रकाशित करनी चाहिए, अपील की अवधियों को अधिनियम के अनुरूप करना चाहिए, झूठे रिकॉर्ड के लिए व्यक्तियों को जवाबदेह ठहराने का साफ़ रास्ता देना चाहिए, और जब भी कोई विनियम वापस ले, उसके कारण बताने चाहिए।

साक्षात्कार का कोण

"मेडिकल कॉलेजों पर निरीक्षकों को 'घोस्ट फ़ैकल्टी' दिखाने के आरोप लगते हैं। नियामक के रूप में आप जुर्माना कॉलेज पर लगाएँगे, झूठे रिकॉर्ड पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति पर, या दोनों पर? क्यों?"

मुख्य निष्कर्ष

  • उद्धरण-योग्य पंक्ति: “जब तक NMC के पास इन सभी कमियों के संतोषजनक उत्तर नहीं हैं, तब तक यह वापसी सरलीकरण कम और नियामक ढील ज़्यादा लगेगी।”
  • मूल विचार: MSMER की वापसी से झूठे रिकॉर्ड पर व्यक्तिगत जुर्माने हट जाते हैं; संपादकीय पूछता है कि क्या MARB की बची हुई शक्तियों का इस्तेमाल होता है और उनके नतीजे प्रकाशित होते हैं।
  • प्रारंभिक परीक्षा के सूत्र: NMC अधिनियम 2019 (2019 का अधिनियम 30), चार बोर्ड (धारा 16), MARB की शक्तियाँ (धारा 26), वार्षिक प्रकटीकरण (धारा 24(i), 25(h)), आयोग के पास अपील (धारा 22(3)); MARB विनियम 2023।
  • नीतिशास्त्र और साक्षात्कार का कोण: व्यक्तिगत बनाम संस्थागत जवाबदेही: झूठे रिकॉर्ड की क़ीमत कौन चुकाए, हस्ताक्षर करने वाला या कॉलेज और उसके छात्र?
  • संभावित प्रश्न: “राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की संरचना और कार्यों की विवेचना कीजिए। इसने चिकित्सा शिक्षा में जवाबदेही को किस हद तक बेहतर बनाया है?” (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2, 150 शब्द)

स्रोत:

  • “Dubious retreat: On the National Medical Commission and its MSMER”, संपादकीय, The Hindu, 27 अक्टूबर 2026
  • NMC notification F. No. Legal/NMC/Misc/2026/22, दिनांक 14 अक्टूबर 2026, Gazette of India (Extraordinary), Part III, Section 4, 16 अक्टूबर 2026
  • Establishment of Medical Institutions, Assessment and Rating Regulations, 2023, Gazette of India (Extraordinary), 2 जून 2023
  • Maintenance of Standards of Medical Education Regulations, 2023 (विनियम का पाठ)
  • National Medical Commission Act, 2019 (PRS प्रति); PIB, 8 अगस्त 2019
  • Business Standard, 23 अक्टूबर 2026
  • मूल्यांकन रिपोर्टों पर Central Information Commission का आदेश, Careers360 की 24 जुलाई 2024 की रिपोर्ट के अनुसार
  • टिप्पणी: उद्धरण-चिह्नों में दिए गए विधिक और आधिकारिक अंश अंग्रेज़ी पाठ के हिंदी अनुवाद हैं।