🗞️ चर्चा में क्यों श्रम और रोज़गार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत असंगठित कामगारों और गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी की है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने 30 अक्टूबर 2026 को इसकी घोषणा की। बोर्ड केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्री की अध्यक्षता में काम करेगा। उसे असंगठित, गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए कल्याण योजनाओं की सिफ़ारिश और निगरानी करनी है, और साल में कम से कम तीन बार उसकी बैठक होना ज़रूरी है।
सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020 का अधिनियम संख्यांक 36) 2020 में बनी थी और 21 नवंबर 2025 से लागू है। इस बोर्ड का प्रावधान संहिता में शुरू से रहा है; अब अधिसूचना के ज़रिए इसका गठन हुआ है। बोर्ड की शक्तियाँ सलाहकारी हैं: वह योजनाओं की सिफ़ारिश और निगरानी करता है, जबकि योजनाएँ केंद्र सरकार बनाती है। परीक्षा के लिहाज़ से इसमें तीन बातें अहम हैं: एक ही बोर्ड के दो रूप कैसे बनते हैं, संहिता गिग कामगारों के कल्याण का ख़र्च कैसे जुटाना चाहती है, और पंजीकरण का आधार अब तक कितना बढ़ा है।
अधिसूचना में क्या कहा गया है
विज्ञप्ति के मुताबिक़ बोर्ड केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्री की अध्यक्षता में काम करेगा और इसमें “केंद्र और राज्य सरकारों, प्रमुख एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक संघों और गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म संघों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।” विज्ञप्ति में न सदस्यों की संख्या दी गई है, न उनके नाम, न उनका कार्यकाल।
विज्ञप्ति के अपने शब्दों में बोर्ड को “पारंपरिक असंगठित कामगारों के साथ-साथ लाखों गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा की खाई पाटने हेतु लक्षित कल्याण योजनाएँ तैयार करने, उनकी निगरानी करने और उनकी सिफ़ारिश करने का दायित्व” सौंपा गया है। लेकिन संहिता में बोर्ड के कार्यों की जो सूची है, और जिसे विज्ञप्ति ने भी दोहराया है, वह पहले बिंदु पर इससे संकरी है: बोर्ड केंद्र सरकार से “उपयुक्त योजनाएँ बनाने के लिए” सिफ़ारिश करता है; योजनाएँ बनाना केंद्र का काम है।
| खंड | कार्य, जैसा विज्ञप्ति में सूचीबद्ध है (संहिता की धारा 6(7)) |
|---|---|
| (a) | असंगठित कामगारों, गिग कामगारों और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के विभिन्न वर्गों के लिए उपयुक्त योजनाएँ बनाने हेतु केंद्र सरकार से सिफ़ारिश करना |
| (b) | इस संहिता के प्रशासन से उत्पन्न ऐसे मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देना, जो उसे भेजे जाएँ |
| (c) | असंगठित कामगारों, गिग कामगारों और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रशासित ऐसी सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी करना |
| (d) | राज्य स्तर पर किए जाने वाले अभिलेख-संधारण कार्यों की समीक्षा करना |
| (e) | कोष और लेखे से हुए व्यय की समीक्षा करना |
| (f) | केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर सौंपे गए अन्य कार्य करना |
बोर्ड “वर्ष में कम से कम तीन बार बैठक करेगा” और केंद्र सरकार की निर्धारित प्रक्रिया-नियमावली का पालन करेगा। संहिता की धारा 6(5) के तहत इसका कार्यकाल तीन वर्ष है।
विज्ञप्ति में कहीं-कहीं “बोर्डों” का ज़िक्र है, लेकिन नाम केवल एक राष्ट्रीय निकाय का है। संहिता अलग से हर राज्य सरकार के लिए एक राज्य बोर्ड अधिसूचित करना ज़रूरी बनाती है, जिसका नाम “(राज्य का नाम) असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड” होगा (धारा 6(9)); विज्ञप्ति में इन बोर्डों की बात नहीं है।
एक बोर्ड, दो संरचनाएँ: धारा 6 और 114(6)
धारा 6(1) कहती है: “केंद्र सरकार, अधिसूचना द्वारा, असंगठित कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन करेगी”। इसके बाद धारा 114(6) इसी बोर्ड को “गिग कामगारों और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के कल्याण के प्रयोजनों के लिए बोर्ड” बनाती है। साथ में एक परंतुक है: जब बोर्ड गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के मामले देखता है, तब धारा 6(2) के खंड (c) और (d) के सदस्यों की जगह सदस्यों का एक अलग समूह ले लेता है। खंड (a) और (b) में दिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वही रहते हैं। इसी वजह से विज्ञप्ति ने सदस्यों में एग्रीगेटर कंपनियों और गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म संघों को भी गिनाया है।
| असंगठित कामगारों के लिए (धारा 6(2)) | गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए (धारा 114(6) का परंतुक) | |
|---|---|---|
| अध्यक्ष | केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्री | वही (खंड (a) की जगह कोई और नहीं आता) |
| उपाध्यक्ष | सचिव, श्रम और रोज़गार मंत्रालय | वही (खंड (b) की जगह कोई और नहीं आता) |
| सदस्य | केंद्र द्वारा नामित 40: असंगठित क्षेत्र के 7 कामगार; असंगठित क्षेत्र के 7 नियोक्ता; नागरिक समाज के 7 प्रतिष्ठित व्यक्ति; लोकसभा से 2 और राज्यसभा से 1; केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से 10; राज्य सरकारों से 5; केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 1 | एग्रीगेटरों के 5 प्रतिनिधि; गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के 5 प्रतिनिधि; निगम के महानिदेशक; केंद्रीय बोर्ड के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त; केंद्र जिन्हें उचित समझे, ऐसे विशेषज्ञ सदस्य; बारी-बारी से राज्य सरकारों के 5 प्रतिनिधि |
| सदस्य-सचिव | महानिदेशक श्रम कल्याण, पदेन | संयुक्त सचिव, श्रम और रोज़गार मंत्रालय |
ये संख्याएँ संहिता में दी गई हैं। विज्ञप्ति यह नहीं बताती कि अधिसूचित बोर्ड में कितने सदस्य हैं या वे कौन हैं।
सिफ़ारिश से लाभ तक: योजनाएँ और कोष
राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड: सिफ़ारिश से लाभ तक
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में बोर्ड, योजनाएँ, सामाजिक सुरक्षा कोष और पंजीकृत कामगार आपस में कैसे जुड़ते हैं।
योजनाएँ। धारा 114(1) बताती है कि गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों की योजनाओं में क्या-क्या शामिल हो सकता है: “(क) जीवन और दिव्यांगता कवर; (ख) दुर्घटना बीमा; (ग) स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ; (घ) वृद्धावस्था संरक्षण; (ङ) शिशुगृह; और (च) केंद्र सरकार द्वारा अवधारित कोई अन्य लाभ।” बोर्ड का काम ऐसी योजनाओं की सिफ़ारिश और निगरानी करना है; इनके लाभ उन्हीं कामगारों तक पहुँचते हैं जो पंजीकृत हैं। धारा 113 के तहत हर असंगठित, गिग या प्लेटफ़ॉर्म कामगार का पंजीकरण ज़रूरी है, बशर्ते उसने सोलह वर्ष की उम्र (या ऐसी उम्र जो विहित की जाए) पूरी कर ली हो और इलेक्ट्रॉनिक या किसी अन्य तरीक़े से स्व-घोषणा जमा कर दी हो।
कोष। धारा 141(1) में प्रावधान है: “केंद्र सरकार असंगठित कामगारों, गिग कामगारों और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों की सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कोष स्थापित करेगी”।
एग्रीगेटर का अंशदान। धारा 114(4) कहती है: “धारा 141 की उपधारा (1) के खंड (ii) में निर्दिष्ट वित्तपोषण के लिए एग्रीगेटरों द्वारा दिया जाने वाला अंशदान, सातवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट एग्रीगेटरों की किसी श्रेणी में आने वाले प्रत्येक ऐसे एग्रीगेटर के वार्षिक टर्नओवर के एक प्रतिशत से अन्यून और दो प्रतिशत से अनधिक ऐसी दर पर होगा, जो केंद्र सरकार अधिसूचित करे: परंतु किसी एग्रीगेटर का अंशदान, एग्रीगेटर द्वारा गिग कामगारों और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों को संदत्त या संदेय राशि के पाँच प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।” धारा 114(5) आगे कहती है: “इस धारा के अधीन एग्रीगेटर से अंशदान के आरंभ की तारीख केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी।” संहिता ख़ुद केवल दर का दायरा और ऊपरी सीमा तय करती है; सटीक दर और शुरू होने की तारीख केंद्र की अधिसूचना पर छोड़ी गई है।
सातवीं अनुसूची (“एग्रीगेटरों का वर्गीकरण”) में नौ श्रेणियाँ हैं:
| # | एग्रीगेटर की श्रेणी |
|---|---|
| 1 | राइड शेयरिंग सेवाएँ |
| 2 | भोजन और किराना डिलीवरी सेवाएँ |
| 3 | लॉजिस्टिक सेवाएँ |
| 4 | वस्तुओं और सेवाओं की थोक या खुदरा बिक्री (B2B और B2C) के लिए ई-मार्केट प्लेस (मार्केट प्लेस और इन्वेंट्री, दोनों मॉडल) |
| 5 | पेशेवर सेवा प्रदाता |
| 6 | स्वास्थ्य देखभाल |
| 7 | यात्रा और आतिथ्य |
| 8 | कंटेंट और मीडिया सेवाएँ |
| 9 | कोई अन्य वस्तु और सेवा प्रदाता प्लेटफ़ॉर्म |
संहिताएँ लागू होने पर सरकार ने अपनी विज्ञप्ति में कहा था कि “‘गिग कार्य’, ‘प्लेटफ़ॉर्म कार्य’ और ‘एग्रीगेटर’ को पहली बार परिभाषित किया गया है।”
ई-श्रम: पंजीकरण का आधार
2021 में शुरू होने के बाद से ई-श्रम असंगठित कामगारों का राष्ट्रीय डेटाबेस है, जिसमें मंत्रालय के शब्दों में “प्लेटफ़ॉर्म कामगार, प्रवासी कामगार आदि भी शामिल हैं”। इसके पाँच साल पूरे होने पर PIB के बैकग्राउंडर में दो आँकड़े दिए गए हैं, जिनकी संदर्भ तिथियाँ अलग-अलग हैं:
- पोर्टल पर 31.89 करोड़ पंजीकरण, 18 अगस्त 2026 की स्थिति के अनुसार;
- लगभग 11.5 लाख प्लेटफ़ॉर्म कामगार पंजीकृत, 25 अगस्त 2026 तक, जो बैकग्राउंडर की अपनी तारीख है।
यानी अब तक के पंजीकरणों में प्लेटफ़ॉर्म कामगारों का अंश छोटा है। बोर्ड चलाने वाली सरकार एक बड़ी उपलब्धि का दावा भी करती है: चार संहिताओं पर अपनी विज्ञप्ति में उसने कहा कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा “2015 में कार्यबल के लगभग 19% से बढ़कर 2025 में 64% से अधिक” हो गया। यह सरकार का आँकड़ा है, कोई स्वतंत्र अनुमान नहीं।
गिनती बेहतर करने की तैयारी भी चल रही है: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण का जो नया स्वरूप प्रस्तावित किया है, उसमें डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए एक अलग स्तर (स्ट्रेटम) जोड़ा गया है (देखें हमारा 23 अक्टूबर का राउंडअप (अंग्रेज़ी))।
पृष्ठभूमि: श्रम आयोग से चार संहिताओं तक
संहिता का उद्देश्यों और कारणों का कथन द्वितीय राष्ट्रीय श्रम आयोग से शुरू होता है, “जिसने जून, 2002 में अपनी रिपोर्ट सौंपी” और जिसने “सिफ़ारिश की थी कि मौजूदा श्रम क़ानूनों को मोटे तौर पर” समूहों में “समामेलित किया जाए”। उसी कथन में यह भी बताया गया है कि विधेयक “एग्रीगेटर”, “गिग कामगार” और “प्लेटफ़ॉर्म कामगार” जैसे पदों को परिभाषित करता है। संहिताओं पर व्यापक बहस के लिए हमारे संपादकीय Calibrating Inbound Investment (अंग्रेज़ी) और The Myth of ‘Unskilled’ Labour (अंग्रेज़ी) देखें, और ESIC व EPFO का दायरा बढ़ाने की पिछली कोशिशों पर हमारा जनवरी 2026 का लेख (अंग्रेज़ी)।
मुख्य परीक्षा की दृष्टि से: अधूरे ढाँचे में एक सलाहकारी बोर्ड
मान्यता। संहिता उन लोगों को सामाजिक सुरक्षा के वैधानिक ढाँचे में लाती है जो नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर काम करते हैं। जब उनके मामले उठते हैं, तब बोर्ड एग्रीगेटरों, गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों और राज्य सरकारों को एक मंच पर बिठाता है (धारा 114(6) के तहत हर पक्ष की पाँच सीटें)।
सलाह, क्रियान्वयन नहीं। धारा 6(7) का हर कार्य सिफ़ारिश करने, सलाह देने, निगरानी करने या समीक्षा करने का है। बोर्ड की असली अहमियत इसी से तय होगी कि केंद्र उसकी सिफ़ारिशों पर क्या करता है, क्योंकि योजनाएँ बनाना केंद्र का काम है।
पैसा। संहिता के तहत गिग कामगारों का कल्याण सामाजिक सुरक्षा कोष और एग्रीगेटर अंशदान पर टिका है, जिसकी सटीक दर और शुरू होने की तारीख केंद्र को अधिसूचित करनी है। ढाँचे में यह लेवी टर्नओवर से जुड़ी है, लेकिन इसकी ऊपरी सीमा इस बात से बँधी है कि एग्रीगेटर अपने कामगारों को कितना भुगतान करता है। धन जुटाने और प्लेटफ़ॉर्मों पर पड़ने वाली लागत के बीच यही संतुलन अधिसूचित दर को साधना होगा।
पहुँच। लाभ केवल पंजीकृत कामगारों को मिल सकता है, और अगस्त 2026 की गिनती में ई-श्रम पर लगभग 11.5 लाख प्लेटफ़ॉर्म कामगार पंजीकृत थे। बोर्ड की योजनाएँ कितनी दूर तक पहुँचेंगी, यह पंजीकरण अभियानों से तय होगा।
संघीय ढाँचा। जब बोर्ड गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए काम करता है, तब राज्यों के पास पाँच सीटें होती हैं, जो बारी-बारी से मिलती हैं। साथ ही हर राज्य को धारा 6(9) के तहत असंगठित कामगारों के लिए अपना बोर्ड अधिसूचित करना है। दोनों स्तरों के बीच तालमेल अहम है, क्योंकि बोर्ड राज्य स्तर पर अभिलेख-संधारण की समीक्षा भी करता है।
आगे क्या। इन क़दमों पर नज़र रखनी होगी: धारा 114(4) और (5) के तहत एग्रीगेटर अंशदान की दर और उसके शुरू होने की तारीख की अधिसूचना; बोर्ड की सलाह पर धारा 114(1) के तहत केंद्र की बनाई पहली योजनाएँ; बोर्ड की बैठकें (साल में कम से कम तीन); और धारा 6(9) के तहत राज्य बोर्ड।
UPSC प्रासंगिकता
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2: जनसंख्या के कमज़ोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ; इन वर्गों की सुरक्षा के लिए गठित तंत्र, क़ानून, संस्थाएँ और निकाय; सांविधिक निकाय।
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: भारतीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार से जुड़े मुद्दे; गिग अर्थव्यवस्था और अनौपचारिक क्षेत्र।
प्रारंभिक परीक्षा: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (गिग कामगार, प्लेटफ़ॉर्म कामगार और एग्रीगेटर की परिभाषाएँ); राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड (धारा 6 और 114(6)); एग्रीगेटर अंशदान का दायरा और ऊपरी सीमा (धारा 114(4)); सामाजिक सुरक्षा कोष (धारा 141); सातवीं अनुसूची की श्रेणियाँ; ई-श्रम।
मुख्य परीक्षा: “सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के वैधानिक ढाँचे में लाती है। राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की भूमिका तथा इन कामगारों के लाभों के वित्तपोषण और उन्हें पहुँचाने की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।” (GS2, 250 शब्द)
📌 तथ्य सार: ज्ञानकोश
प्रारंभिक परीक्षा: कथन-योग्य तथ्य:
- असंगठित कामगारों और गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए NSSB: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत अधिसूचित; PIB ने 30 अक्टूबर 2026 को घोषणा की
- अध्यक्ष: केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्री; उपाध्यक्ष: सचिव, श्रम और रोज़गार मंत्रालय
- धारा 6(1): असंगठित कामगारों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन केंद्र अधिसूचना द्वारा करता है
- धारा 6(5) और 6(6): बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष है, और उसकी बैठक साल में कम से कम तीन बार होती है
- धारा 6(2): असंगठित कामगारों के लिए 40 नामित सदस्य, जिनमें 2 लोकसभा से और 1 राज्यसभा से
- धारा 114(6): यही बोर्ड गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए भी काम करता है, जिसमें एग्रीगेटरों के 5 और गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के 5 प्रतिनिधि होते हैं
- धारा 114(4): एग्रीगेटर का अंशदान वार्षिक टर्नओवर का 1 से 2%, अधिसूचित की जाने वाली दर पर; अधिकतम सीमा गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों को किए गए भुगतान का 5%
- धारा 141(1): असंगठित, गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष, जिसे केंद्र सरकार स्थापित करेगी
- धारा 113: पंजीकरण के लिए 16 वर्ष की उम्र (या जो विहित हो) और स्व-घोषणा ज़रूरी
- सामाजिक सुरक्षा संहिता: 2020 का अधिनियम संख्यांक 36; अन्य तीन श्रम संहिताओं के साथ 21 नवंबर 2025 से प्रभावी
- ई-श्रम: 26 अगस्त 2021 को शुरू; 18 अगस्त 2026 की स्थिति के अनुसार 31.89 करोड़ पंजीकरण
प्रारंभिक परीक्षा: संभावित जाल:
- बोर्ड योजनाओं की सिफ़ारिश करता है (धारा 6(7)(a)); योजनाएँ केंद्र सरकार बनाती है। बोर्ड ख़ुद न योजनाएँ चलाता है, न उनका वित्तपोषण करता है
- 1 से 2% का दायरा एग्रीगेटर के वार्षिक टर्नओवर पर है; 5% की सीमा गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों को संदत्त या संदेय राशि पर है
- सदस्य-सचिव: असंगठित कामगारों के लिए महानिदेशक श्रम कल्याण; गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों के लिए श्रम मंत्रालय के संयुक्त सचिव
- गिग कामगार (धारा 2(35)) और प्लेटफ़ॉर्म कामगार (धारा 2(61)) की परिभाषाएँ अलग-अलग हैं; प्लेटफ़ॉर्म कार्य ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए होता है
- राष्ट्रीय बोर्ड धारा 6(1) के तहत; हर राज्य सरकार धारा 6(9) के तहत अपना राज्य बोर्ड अधिसूचित करती है
मुख्य परीक्षा: तर्क और मुख्य शब्द:
- नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर के काम को वैधानिक सुरक्षा; गिग से जुड़े मामलों में एग्रीगेटर और कामगार एक ही बोर्ड में
- मुख्य शब्द: सामाजिक सुरक्षा की खाई, एग्रीगेटर अंशदान, सामाजिक सुरक्षा कोष, स्व-घोषणा, ई-श्रम, सातवीं अनुसूची, सहकारी संघवाद
साक्षात्कार: इनके लिए तैयार रहें:
- “क्या प्लेटफ़ॉर्मों को उन कामगारों के लिए भुगतान करना चाहिए जो उनके कर्मचारी नहीं हैं?” संहिता का जवाब है हाँ: टर्नओवर पर आधारित अंशदान के ज़रिए, जिसकी अधिकतम सीमा कामगारों को किए गए भुगतान का 5% है।
स्रोत: Press Information Bureau (Ministry of Labour & Employment), राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड पर विज्ञप्ति, 30 अक्टूबर 2026 (Release ID 2330299)। The Code on Social Security, 2020 (Act No. 36 of 2020), India Code पाठ, नवंबर 2025 तक अद्यतन, उद्देश्यों और कारणों के कथन सहित। PIB, चार श्रम संहिताओं पर विज्ञप्ति (नवंबर 2025)। PIB Backgrounder, “5 Years of e-Shram Portal” (अगस्त 2026)। PIB, ई-श्रम पोर्टल के क्रियान्वयन पर विज्ञप्ति (अगस्त 2026)।
- टिप्पणी: उद्धरण-चिह्नों में दिए गए विधिक और आधिकारिक अंश अंग्रेज़ी पाठ के हिंदी अनुवाद हैं।
संशोधन (30 अक्टूबर 2026): व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता, 2020 का हिंदी नाम पहले एक अनौपचारिक रूप में लिखा गया था; अब PIB हिंदी में प्रयुक्त रूप दिया गया है।