UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास
UPSC प्रारंभिक परीक्षा क्विज़ 31 अक्टूबर 2026: करेंट अफेयर्स MCQ
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आज के करेंट अफेयर्स पर आधारित 10 प्रश्न
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प्रश्न 1 / 10
1. NavIC एक क्षेत्रीय प्रणाली है, जो भारत और उसकी सीमा से 1,500 किमी आगे तक के क्षेत्र को कवर करती है, जबकि GPS और Galileo पूरे विश्व को सेवा देते हैं।
2. NavIC की संरचना में नक्षत्र के सभी सात उपग्रह भूस्थिर कक्षा में स्थापित किए जाते हैं।
3. NavIC की आधारभूत स्थिति-निर्धारण सेवा के लिए कक्षा में कम से कम चार प्रचालनरत उपग्रह आवश्यक हैं।
4. GSLV के क्रायोजेनिक ऊपरी चरण को शक्ति देने वाला CE-7.5 इंजन तरल ऑक्सीजन के साथ तरल हाइड्रोजन जलाता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
तथ्य: कथन 1 सही है: NavIC (Navigation with Indian Constellation), जिसे पहले IRNSS कहा जाता था, भारत और उसकी सीमा के चारों ओर 1,500 किमी तक फैले क्षेत्र को कवर करता है, जबकि GPS (संयुक्त राज्य अमेरिका), GLONASS (रूस), Galileo (यूरोपीय संघ) और BeiDou (चीन) वैश्विक प्रणालियाँ हैं।
कथन 2 गलत है: तीन उपग्रह भूस्थिर कक्षा में 32.5°E, 83°E और 129.5°E पर हैं, और चार उपग्रह 29° के झुकाव वाली आनत भू-तुल्यकाली कक्षा में हैं, हर तल में दो।
कथन 3 सही है: अंतरिक्ष विभाग ने लोकसभा को बताया था कि आधारभूत स्थिति-निर्धारण के लिए कम से कम चार प्रचालनरत उपग्रह आवश्यक हैं। इसी वजह से तीन उपग्रहों वाला नक्षत्र स्वतंत्र स्थिति-निर्धारण नहीं दे सका, हालाँकि उसकी समय-निर्धारण (टाइमिंग) सेवा काम करती रही।
कथन 4 सही है: द्रव नोदन प्रणाली केंद्र (LPSC) ने भारत का पहला क्रायोजेनिक इंजन CE-7.5 विकसित किया है; यह चरणबद्ध दहन चक्र में तरल ऑक्सीजन के साथ तरल हाइड्रोजन जलाता है।
विश्लेषण: GSLV-F18 ने दूसरी पीढ़ी के तीसरे NavIC उपग्रह NVS-03 को भू-तुल्यकाली अंतरण कक्षा में स्थापित किया है। चार उपग्रहों की न्यूनतम सीमा में यह तभी गिना जाएगा, जब यह अपनी कक्षा ऊपर उठाकर सेवा में आ जाएगा।
अवधारणा नोट
NavIC दो सेवाएँ देता है: नागरिक उपयोगकर्ताओं के लिए मानक स्थिति सेवा (Standard Position Service) और सामरिक उपयोगकर्ताओं के लिए प्रतिबंधित सेवा (Restricted Service)। रिसीवर अपनी स्थिति इस आधार पर निकालता है कि हर उपग्रह का सिग्नल पहुँचने में कितना समय लेता है, इसलिए हर उपग्रह में परमाणु घड़ियाँ होती हैं। घड़ियों की ख़राबी ही NavIC की सबसे बड़ी कमज़ोरी रही है: IRNSS-1F की खरीदी गई घड़ी मार्च 2026 में बंद हो गई, उसके 10 वर्ष के डिज़ाइन जीवन के पूरा होने के कुछ ही दिन बाद। दूसरी पीढ़ी (NVS-01 से NVS-05) में खरीदी गई घड़ियों के साथ एक स्वदेशी परमाणु घड़ी भी है, और मौजूदा L5 और S सिग्नलों के अलावा एक नया नागरिक L1 सिग्नल (1575.42 MHz) भी जोड़ा गया है, जो अन्य GNSS सिग्नलों के साथ अंतर-प्रचालनीय है। मई 2023 में GSLV-F12 से प्रक्षेपित NVS-01 पहली स्वदेशी परमाणु घड़ी लेकर गया था। अपने F18 रूप में GSLV के तीन चरण हैं: चार L40H तरल स्ट्रैप-ऑन के साथ S139 ठोस कोर, GL40HT दूसरा चरण और CUS15 क्रायोजेनिक ऊपरी चरण। ISRO के अनुसार GSLV 2 टन श्रेणी तक के संचार उपग्रह प्रक्षेपित कर सकता है, जबकि 4 टन श्रेणी का काम LVM3 करता है। भूस्थिर उपग्रह भूमध्य रेखा से लगभग 35,786 किमी ऊपर रहता है; उसे पहले एक लंबी अंतरण कक्षा में रखा जाता है और फिर भू-दूरस्थ बिंदु (अपोजी) से ऊपर उठाया जाता है।
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प्रश्नपत्रों से जुड़ाव: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उसके अनुप्रयोग; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3, सुरक्षा, स्वतंत्र नौवहन प्रणाली का सामरिक महत्व।
मुख्य परीक्षा के प्रमुख शब्द: सामरिक स्वायत्तता, PNT (स्थिति, नौवहन और समय), नक्षत्र की निरंतरता, स्वदेशी परमाणु घड़ियाँ।
सामान्य भूल: NavIC को वैश्विक प्रणाली या पूरी तरह भूस्थिर प्रणाली मान लेना; यह क्षेत्रीय है, और इसकी संरचना में 3 GEO और 4 आनत भू-तुल्यकाली उपग्रह हैं।
परीक्षा सुझाव: अंतरण कक्षा में पहुँचना अपने निर्धारित स्थान पर पहुँचना नहीं है: उपग्रह को अभी अपनी कक्षा ऊपर उठानी है और सेवा में लाया जाना है।
साक्षात्कार का कोण: जब GPS मुफ़्त में उपलब्ध है, तो भारत को अपनी स्वतंत्र नौवहन प्रणाली क्यों बनाए रखनी चाहिए?
प्रश्न 2 / 10
1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग संसद के एक अधिनियम के तहत गठित सांविधिक निकाय है।
2. NCR में वायु गुणवत्ता के लिए एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र PAVAN, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्लेटफ़ॉर्म है।
3. वायु गुणवत्ता सूचकांक की छह श्रेणियाँ हैं, और जिस प्रदूषक का उप-सूचकांक सबसे ख़राब होता है, वही समग्र AQI तय करता है।
4. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का संशोधित लक्ष्य PM2.5 सांद्रता में कमी के रूप में तय किया गया है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
तथ्य: कथन 1 सही है: CAQM संसद के एक अधिनियम, 2021 का अधिनियम संख्यांक 29, के तहत बना सांविधिक निकाय है।
कथन 2 गलत है: PAVAN (Platform for Air quality Vigilance and Analytics for NCR) CAQM का एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (I3C) है, CPCB का नहीं; इसे आँकड़े देने वाले निगरानी केंद्र CPCB, IMD और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगाते हैं।
कथन 3 सही है: AQI की श्रेणियाँ अच्छा, संतोषजनक और मध्यम से लेकर ख़राब, बहुत ख़राब और गंभीर तक जाती हैं। इसमें आठ प्रदूषक शामिल हैं, और सबसे ख़राब उप-सूचकांक ही समग्र मान तय करता है।
कथन 4 गलत है: NCAP का संशोधित लक्ष्य 2025-26 तक PM10 में 40% तक की कमी, या 60 µg/m³ का स्तर है; यह PM10 का लक्ष्य है।
विश्लेषण: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने PAVAN-I3C के दौरे पर कहा कि पूरे NCR में 5 से 20 नवंबर तक निर्माण और विध्वंस का काम रोका जाएगा। यानी पूरे क्षेत्र पर लागू प्रतिबंध की घोषणा एक ऐसे साधन के साथ हुई, जिसका उद्देश्य लक्षित प्रवर्तन को संभव बनाना है।
अवधारणा नोट
PAVAN-I3C को एकल खिड़की वाला डिजिटल तंत्रिका केंद्र बताया गया है। यह 30 से अधिक API और डेटा धाराओं को जोड़ता है: दिल्ली-NCR के 111 सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों (CAAQMS) के आँकड़े, 2,300 से अधिक उद्योग और 3,200 से अधिक सक्रिय निर्माण स्थल। यह ‘पता लगाओ, विश्लेषण करो, कार्रवाई करो’ (Detect, Analyse, Act) के सिद्धांत पर काम करता है: मानकों या सांविधिक निर्देशों से कोई विचलन होते ही अलर्ट जाता है और मामला संबंधित एजेंसी तक पहुँचाया जाता है। इसके मॉड्यूल उद्योगों के OCEMS उत्सर्जन आँकड़ों, IARI, ISRO और FIRMS से फसल अवशेष जलाने के उपग्रह आँकड़ों, लैंडफ़िल फ़ीड, VAHAN आँकड़ों और Green Delhi तथा SAMEER ऐप के ज़रिए आई नागरिक शिकायतों का इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लिए एक राज्य कार्य योजना मॉड्यूल भी है। इसके साथ श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) चलती है: इसके चार चरण हैं, और हर चरण पिछले चरणों के ऊपर जुड़ता है। 21 अक्टूबर 2026 को पूरे NCR में GRAP का चरण I लागू किया गया, और सितंबर 2026 की संशोधित अनुसूची में 48 कार्रवाइयाँ हैं (चार चरणों में 25, 8, 10 और 5)। पर्यावरण मंत्रालय ने NCAP जनवरी 2019 में 131 गैर-प्राप्ति और मिलियन-प्लस शहरों के लिए शुरू किया था।
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प्रश्नपत्रों से जुड़ाव: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3, पर्यावरण प्रदूषण और संरक्षण; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2, सांविधिक और विनियामक निकाय, अंतर-राज्य समन्वय।
मुख्य परीक्षा के प्रमुख शब्द: एयरशेड शासन, अति-स्थानीय आँकड़े, अलर्ट-आधारित अनुपालन, श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया।
सामान्य भूल: PAVAN-I3C को CPCB का बताना, या NCAP को PM2.5 का लक्ष्य समझना; यह CAQM का प्लेटफ़ॉर्म है और NCAP का लक्ष्य PM10 है।
परीक्षा सुझाव: AQI की छह श्रेणियाँ हैं; GRAP के चार चरण हैं, और उसके चरण संचयी हैं।
साक्षात्कार का कोण: अगर राज्य बोर्ड और स्थानीय निकाय इसके अलर्ट पर कार्रवाई न करें, तो क्या एक नियंत्रण कक्ष दिल्ली की हवा साफ़ कर पाएगा?
प्रश्न 3 / 10
1. घरेलू वाणिज्यिक बैंकों के लिए प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार के लक्ष्य समायोजित निवल बैंक ऋण या तुलनपत्र से इतर एक्सपोज़र के ऋण समतुल्य, इनमें से जो भी अधिक हो, के अंश के रूप में तय किए जाते हैं।
2. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार का समग्र लक्ष्य घरेलू वाणिज्यिक बैंकों से कम है।
3. अग्रणी बैंक योजना भारतीय रिज़र्व बैंक ने शुरू की थी, और इसका शीर्ष स्तर राज्य स्तरीय बैंकर समिति है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
तथ्य: कथन 1 सही है: RBI के मास्टर निदेशों के तहत लक्ष्य ANBC या CEOBSE, इनमें से जो भी अधिक हो, के आधार पर निकाले जाते हैं।
कथन 2 गलत है: घरेलू वाणिज्यिक बैंकों (और 20 या उससे अधिक शाखाओं वाले विदेशी बैंकों) के लिए समग्र लक्ष्य 40% है, लेकिन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए 75% और शहरी सहकारी बैंकों के लिए 60% है।
कथन 3 सही है: RBI ने अग्रणी बैंक योजना दिसंबर 1969 में शुरू की थी। यह आधार में ब्लॉक स्तरीय बैंकर समिति, बीच में ज़िला परामर्शदात्री समिति और ज़िला स्तरीय समीक्षा समिति, और शीर्ष पर राज्य स्तरीय बैंकर समिति (या संघ राज्य क्षेत्र स्तरीय बैंकर समिति) के ज़रिए काम करती है।
विश्लेषण: केंद्र की नई विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति को ‘प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार के ढाँचे और अग्रणी बैंक योजना की समीक्षा करनी है, ताकि उनकी प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और समन्वय का आकलन हो सके’। समिति ने अभी कोई सिफ़ारिश नहीं की है; उसका काम समीक्षा करना और सुझाव देना है।
अवधारणा नोट
प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार के तहत बैंकों को अपने ऋण का एक तय अंश कृषि और सूक्ष्म उद्यमों जैसे क्षेत्रों को देना होता है। घरेलू वाणिज्यिक बैंकों के उप-लक्ष्य हैं: कृषि 18% (गैर-कॉरपोरेट किसानों के लिए 14%, जिसमें से 10% छोटे और सीमांत किसानों के लिए), सूक्ष्म उद्यम 7.5% और कमज़ोर वर्ग 12%। मौजूदा मास्टर निदेश 24 मार्च 2025 के हैं और 1 अप्रैल 2025 से लागू हुए। अग्रणी बैंक योजना गाडगिल अध्ययन दल (अक्टूबर 1969) और नरीमन समिति (नवंबर 1969) के बाद आई: RBI हर ज़िले में एक वाणिज्यिक बैंक को अग्रणी बैंक नामित करता है, जो बैंकों, सरकार और NABARD के बीच समन्वय करता है, ताकि ऋण प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक पहुँचे। 31 मार्च 2025 की स्थिति में 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और दो निजी क्षेत्र के बैंक 782 ज़िलों में अग्रणी बैंक थे, और RBI ने 19 जून 2026 को संशोधित दिशानिर्देश जारी किए। नई समिति की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त सुरेश एन. पटेल कर रहे हैं और इसका कार्यकाल छह महीने का है। इसका प्रस्ताव 1 फ़रवरी 2026 के बजट भाषण के पैराग्राफ़ 42 में रखा गया था; इसके विचारार्थ विषयों में विवेकपूर्ण मानदंड, पूंजी की ज़रूरत, पूंजी की लागत और बैंकिंग में AI भी शामिल हैं।
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प्रश्नपत्रों से जुड़ाव: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3, समावेशी विकास और संसाधनों का संग्रहण; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2, सरकारी नीतियाँ और विनियामक के रूप में RBI।
मुख्य परीक्षा के प्रमुख शब्द: निर्देशित ऋण, वित्तीय समावेशन, ANBC, ज़िला ऋण योजना।
सामान्य भूल: यह मान लेना कि RRB पर PSL का बोझ हल्का है; उनका 75% का लक्ष्य वाणिज्यिक बैंकों के 40% से कहीं अधिक है।
परीक्षा सुझाव: LBS के स्तर इस क्रम में हैं: ब्लॉक (BLBC), ज़िला (DCC और DLRC), राज्य (SLBC या UTLBC)।
साक्षात्कार का कोण: क्या 1969 के दौर की सोच से निकले नियम-आधारित ऋण अंश आज की डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था में भी समावेशन का सबसे अच्छा रास्ता हैं?
प्रश्न 4 / 10
1. 'पुलिस' और 'लोक व्यवस्था' सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टियाँ हैं।
2. PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य (2014) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय की गई अपेक्षाएँ अनुच्छेद 141 के तहत घोषित विधि के रूप में बाध्यकारी हैं।
3. PUCL अपेक्षाओं के तहत मुठभेड़ में हुई मौत की स्वतंत्र जाँच राज्य पुलिस से बाहर की किसी एजेंसी को करनी होती है।
4. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 196, जिसने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 176 का स्थान लिया है, पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति की मृत्यु या गुमशुदगी पर पुलिस अन्वेषण के अतिरिक्त मजिस्ट्रेट द्वारा जाँच अनिवार्य करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
तथ्य: कथन 1 गलत है: ‘लोक व्यवस्था’ और ‘पुलिस’ सूची II, यानी राज्य सूची, की प्रविष्टि 1 और 2 हैं; इसलिए पुलिस राज्य का विषय है।
कथन 2 सही है: न्यायालय ने निर्देश दिया था कि उसकी अपेक्षाओं का ‘पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु और गंभीर चोट के सभी मामलों में, उन्हें अनुच्छेद 141 के तहत घोषित विधि मानते हुए, कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए’।
कथन 3 गलत है: PUCL में CID या किसी दूसरे पुलिस थाने की पुलिस टीम से जाँच की बात है, जिसकी निगरानी पुलिस दल के प्रमुख से कम से कम एक स्तर ऊपर का अधिकारी करे; राज्य पुलिस से बाहर की एजेंसी का प्रस्ताव लेख में रखा गया है, यह न्यायालय का नियम नहीं है।
कथन 4 सही है: BNSS की धारा 196 ने CrPC की धारा 176 का स्थान लिया है, और पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति की मृत्यु या गुमशुदगी पर मजिस्ट्रेट द्वारा जाँच अनिवार्य करती है।
विश्लेषण: पश्चिम बंगाल में पुलिस फ़ायरिंग में दो आरोपियों की मौत के बाद झूमा सेन का The Indian Express में तर्क है कि क़ानून तो तय है, लेकिन उसका पालन ‘काग़ज़ी कार्रवाई बनकर रह गया है’।
अवधारणा नोट
अनुच्छेद 21 के अनुसार किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है। पुलिस के हाथों हुई मौत इसकी सीधी परीक्षा है, क्योंकि गोली चलाने वाला पक्ष भी राज्य है और जाँच करने वाली एजेंसी भी। PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य (23 सितंबर 2014) में मुख्य न्यायाधीश आर.एम. लोढ़ा और न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन की पीठ ने सोलह अपेक्षाएँ तय कीं: न्यायालय को भेजी गई FIR, स्वतंत्र जाँच, पुलिस फ़ायरिंग में हर मौत की मजिस्ट्रेटी जाँच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) या राज्य मानवाधिकार आयोग को बिना देरी के सूचना, मुआवज़ा, और न तो बारी से पहले पदोन्नति, न तुरंत वीरता पुरस्कार। मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत 12 अक्टूबर 1993 को गठित NHRC ने मई 2010 से अपने दिशानिर्देशों (पहली बार 2003 में जारी, 12 मई 2010 को संशोधित) के तहत यह अनिवार्य कर रखा है कि पुलिस कार्रवाई में हर मौत की सूचना उसे 48 घंटे के भीतर दी जाए। आरिफ़ मो. यासीन ज्वाडर बनाम असम राज्य (2025) में न्यायालय ने असम में कथित मुठभेड़ों की जाँच असम मानवाधिकार आयोग को सौंपी। प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) में संरचनात्मक सुधार का आदेश दिया गया था, जिसमें राज्य सुरक्षा आयोग और पुलिस महानिदेशक (DGP) का कम से कम दो वर्ष का कार्यकाल शामिल है।
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प्रश्नपत्रों से जुड़ाव: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2, मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21), न्यायपालिका और सांविधिक निकाय (NHRC); सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 4, साध्य और साधन, लोक सेवकों की जवाबदेही।
मुख्य परीक्षा के प्रमुख शब्द: न्यायेतर हत्या, विधि का शासन, स्वतंत्र जाँच, पुलिस सुधार।
सामान्य भूल: पुलिस को समवर्ती सूची में रखना, या PUCL को बाहरी एजेंसी की अनिवार्यता समझना; पुलिस राज्य का विषय है और PUCL में CID या दूसरे पुलिस थाने की टीम की बात है।
परीक्षा सुझाव: प्रावधानों को जोड़कर याद करें: अनुच्छेद 21 (अधिकार), अनुच्छेद 141 (PUCL क्यों बाध्यकारी है), BNSS की धारा 196 (मजिस्ट्रेट द्वारा जाँच), NHRC का 48 घंटे में सूचना का नियम।
साक्षात्कार का कोण: ज़िला मजिस्ट्रेट के रूप में, किसी आरोपी की पुलिस फ़ायरिंग में मौत के बाद पहले 48 घंटों में आप क्या करेंगे?
प्रश्न 5 / 10
कथन-I: भारत-चीन सीमा प्रश्न के समाधान के लिए राजनीतिक मानदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों पर समझौते पर चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की यात्रा के दौरान नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए थे।
कथन-II: उस समझौते के अनुच्छेद I में प्रावधान है कि कोई भी पक्ष दूसरे के विरुद्ध किसी भी साधन से बल का प्रयोग नहीं करेगा या बल प्रयोग की धमकी नहीं देगा।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?
तथ्य: कथन-I सही है: विदेश मंत्रालय (MEA) के रिकॉर्ड के अनुसार इस समझौते पर 11 अप्रैल 2005 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की यात्रा के दौरान हस्ताक्षर हुए थे; इसी यात्रा में ‘शांति और समृद्धि के लिए रणनीतिक और सहयोगात्मक साझेदारी’ की भी घोषणा हुई थी।
कथन-II सही है: लेकिन यह कथन-I की व्याख्या नहीं करता। अनुच्छेद I कहता है, ‘कोई भी पक्ष दूसरे के विरुद्ध किसी भी साधन से बल का प्रयोग नहीं करेगा या बल प्रयोग की धमकी नहीं देगा’। यह समझौते की एक शर्त है, जो इस बारे में कुछ नहीं कहती कि उस पर कहाँ या किसकी यात्रा के दौरान हस्ताक्षर हुए। अनुच्छेद VII यह जोड़ता है कि दोनों पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में बसी आबादी के उचित हितों की रक्षा करेंगे।
विश्लेषण: पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन ने The Hindu में लिखते हुए इस समझौते को ‘राष्ट्रपति हू जिंताओ के दौर’ का बताया है, और अनुच्छेद I और VII को इस बात के प्रमाण के रूप में रखा है कि चीन ‘जानता है कि कब झुकना है’। हू जिंताओ उस समय चीन के राष्ट्रपति थे, लेकिन समझौता प्रधानमंत्री की यात्रा का है।
अवधारणा नोट
भारत और चीन के बीच सीमा तय नहीं है। 7 सितंबर 1993 को बीजिंग में हुए समझौते के तहत दोनों पक्ष अंतिम समाधान होने तक ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा का कड़ाई से सम्मान और पालन करेंगे’, और LAC के उल्लेख ‘सीमा प्रश्न पर उनके अपने-अपने रुख़ पर प्रतिकूल असर नहीं डालते’। इसके बाद सैन्य क्षेत्र में विश्वास बहाली उपायों पर 1996 का समझौता आया, जिस पर 29 नवंबर 1996 को हस्ताक्षर हुए। सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र 2003 में बना और इसकी 25 दौर की बैठकें हो चुकी हैं, सबसे हाल की 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में। परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) जनवरी 2012 में विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 15वें दौर में हुई सहमति से बना और इसकी 36 बैठकें हो चुकी हैं, सबसे हाल की 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में। अप्रैल-मई 2020 में पूर्वी लद्दाख की घटनाओं और 15 जून 2020 को गलवान में हुई हिंसा से संबंधों को धक्का लगा; गलवान में 20 भारतीय सैन्यकर्मियों ने अपनी जान गँवाई। अक्टूबर 2024 में गश्त व्यवस्था पर हुए समझौते के बाद 2020 के सभी टकराव बिंदुओं से सैनिकों की वापसी हुई। भारत का रुख़ कायम है: अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश भारत के अभिन्न अंग हैं।
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प्रश्नपत्रों से जुड़ाव: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2, भारत और उसका पड़ोस, द्विपक्षीय समझौते; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3, सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ।
मुख्य परीक्षा के प्रमुख शब्द: प्रबंधित सह-अस्तित्व, विश्वास बहाली उपाय, शांति और स्थिरता, संवाद तंत्र।
सामान्य भूल: 2005 के समझौते को राष्ट्रपति हू जिंताओ की यात्रा से जोड़ना; इस पर प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की यात्रा के दौरान, नई दिल्ली में, हस्ताक्षर हुए थे।
परीक्षा सुझाव: समझौतों और तंत्रों को क्रम से याद करें: 1993 (LAC का सम्मान), 1996 (सैन्य CBM), 2003 (विशेष प्रतिनिधि तंत्र), 2005 (राजनीतिक मानदंड), 2012 (WMCC)।
साक्षात्कार का कोण: क्या चीन के साथ संवाद और LAC पर तैयारी, दोनों एक साथ चल सकते हैं, या एक दूसरे को कमज़ोर करता है?
प्रश्न 6 / 10
1. केंद्र की प्राप्तियों में गिना जाने वाला कर राजस्व राज्यों को हस्तांतरित करों के उनके हिस्से को घटाकर निवल होता है।
2. ब्याज भुगतान केंद्र के पूंजीगत व्यय का एक घटक है।
3. प्रमुख सब्सिडी राजस्व व्यय में दर्ज की जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
तथ्य: कथन 1 सही है: मासिक लेखों में कर राजस्व ‘केंद्र को निवल’ दिखाया जाता है, और राज्यों के कर हिस्से का हस्तांतरण अलग से दर्ज होता है, जो सितंबर 2026 तक ₹6,99,409 करोड़ रहा।
कथन 2 गलत है: ब्याज भुगतान राजस्व व्यय का हिस्सा हैं; सितंबर तक राजस्व व्यय में से ₹6,46,010 करोड़ इन पर गए, जो पूंजी खाते पर ख़र्च हुए ₹6,54,547 करोड़ के लगभग बराबर है।
कथन 3 सही है: प्रमुख सब्सिडी, सितंबर तक ₹2,22,905 करोड़, राजस्व व्यय में आती हैं।
विश्लेषण: सितंबर 2026 तक के लेखों की वित्त मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार प्राप्तियाँ ₹18,35,422 करोड़ रहीं, जो 2026-27 के बजट अनुमान (BE) का 50.3% है, और व्यय ₹25,49,835 करोड़ रहा, जो BE का 47.7% है।
अवधारणा नोट
मासिक लेखों में केंद्र की प्राप्तियों के तीन हिस्से होते हैं: केंद्र को निवल कर राजस्व, गैर-कर राजस्व और गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियाँ। सितंबर 2026 तक ये क्रमशः ₹12,76,088 करोड़, ₹4,80,732 करोड़ और ₹78,602 करोड़ थीं, कुल ₹18,35,422 करोड़। व्यय राजस्व खाते (₹18,95,288 करोड़) और पूंजी खाते (₹6,54,547 करोड़) में बँटा है। राजस्व व्यय से कोई परिसंपत्ति नहीं बनती, और इसमें दो सबसे बड़ी प्रतिबद्ध मदें, ब्याज भुगतान और प्रमुख सब्सिडी, शामिल हैं। पूंजीगत व्यय वह ख़र्च है जिससे परिसंपत्तियाँ बनती हैं; इसीलिए कुल ख़र्च में इसके हिस्से पर व्यय की गुणवत्ता के पैमाने के रूप में नज़र रखी जाती है। कर हस्तांतरण केंद्रीय करों में राज्यों के हिस्से का अंतरण है; 2026-27 की पहली छमाही में यह एक साल पहले की तुलना में ₹67,658 करोड़ अधिक रहा। केंद्र जितना ख़र्च करता है और उधार लिए बिना जितना पाता है, उसके बीच का अंतर राजकोषीय घाटा है।
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प्रश्नपत्रों से जुड़ाव: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3, सरकारी बजट, संसाधनों का संग्रहण; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2, राजकोषीय संघवाद।
मुख्य परीक्षा के प्रमुख शब्द: व्यय की गुणवत्ता, प्रतिबद्ध व्यय, कर हस्तांतरण, राजकोषीय सुदृढ़ीकरण।
सामान्य भूल: ब्याज भुगतान को उधार से जुड़ा होने के कारण पूंजीगत व्यय में गिनना; यह राजस्व व्यय है।
परीक्षा सुझाव: प्राप्तियाँ = निवल कर राजस्व + गैर-कर राजस्व + गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियाँ; व्यय = राजस्व खाता + पूंजी खाता।
साक्षात्कार का कोण: ब्याज भुगतान लगभग पूंजीगत व्यय के बराबर हैं; सार्वजनिक निवेश की गुंजाइश के बारे में इससे क्या पता चलता है?
प्रश्न 7 / 10
1. भारत AI शासन दिशानिर्देश सात मार्गदर्शक सूत्रों पर आधारित हैं, जिनमें 'विश्वास ही आधार है' (Trust is the Foundation) और 'जनता प्रथम' (People First) शामिल हैं।
2. 'नवाचार पर संयम को वरीयता' (Restraint over Innovation) भारत AI शासन दिशानिर्देशों के सात मार्गदर्शक सूत्रों में से एक है।
3. 'डिज़ाइन के अनुसार समझने योग्य' (Understandable by Design) और 'जवाबदेही' (Accountability) सात मार्गदर्शक सूत्रों में शामिल हैं।
4. भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण हितधारकों की टिप्पणियों के लिए जो दिशानिर्देश मसौदे के रूप में जारी करता है, वे जारी होने की तिथि से ही दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर बाध्यकारी होते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
तथ्य: कथन 1 सही है: फ़रवरी 2026 के भारत AI शासन दिशानिर्देश सात मार्गदर्शक सूत्रों पर टिके हैं, जिनमें पहले दो हैं ‘विश्वास ही आधार है’ और ‘जनता प्रथम’।
कथन 2 गलत है: सूत्र उलटा है: ‘संयम पर नवाचार को वरीयता’ (Innovation over Restraint)।
कथन 3 सही है: ‘जवाबदेही’ और ‘डिज़ाइन के अनुसार समझने योग्य’ सूत्र हैं, और इनके साथ ‘निष्पक्षता और समानता’ (Fairness & Equity) तथा ‘सुरक्षा, लचीलापन और स्थिरता’ (Safety, Resilience & Sustainability) भी।
कथन 4 गलत है: टिप्पणियों के लिए जारी मसौदा एक परामर्श है, बाध्यकारी नियम नहीं; TRAI ने दूरसंचार नेटवर्क में AI के ज़िम्मेदार इस्तेमाल पर अपने मसौदा दिशानिर्देशों पर 27 नवंबर 2026 तक लिखित टिप्पणियाँ माँगी हैं।
विश्लेषण: TRAI के अनुसार AI को दूरसंचार नेटवर्क और सेवाओं में तेज़ी से जोड़ा जा रहा है, इसलिए उसने क्षेत्र-विशेष दिशानिर्देश बनाने का रास्ता चुना, ताकि दूरसंचार में राष्ट्रीय दिशानिर्देश एकरूपता और ज़िम्मेदारी के साथ लागू हों।
अवधारणा नोट
TRAI ने 2026 की प्रेस विज्ञप्ति संख्या 145 के ज़रिए ‘Guidelines on Responsible Use of Artificial Intelligence (AI) in Telecommunication Networks and Provision of Telecommunication Services’ (दूरसंचार नेटवर्क और दूरसंचार सेवाओं में AI के ज़िम्मेदार इस्तेमाल पर दिशानिर्देश) का मसौदा हितधारकों की टिप्पणियों के लिए जारी किया। यह मसौदा फ़रवरी 2026 के भारत AI शासन दिशानिर्देशों पर आधारित है, जिनके सात मार्गदर्शक सूत्र हैं: विश्वास ही आधार है; जनता प्रथम; संयम पर नवाचार को वरीयता; निष्पक्षता और समानता; जवाबदेही; डिज़ाइन के अनुसार समझने योग्य; और सुरक्षा, लचीलापन और स्थिरता। परीक्षा के लिए क्रम अहम है: राष्ट्रीय ढाँचा नवाचार को संयम से आगे रखता है, इसलिए क्षेत्र-विशेष दिशानिर्देश अलग लाइसेंस व्यवस्था जोड़ने के बजाय व्यापक सिद्धांतों को एकरूप व्यवहार में बदलते हैं। टिप्पणियों के लिए खुला मसौदा विनियमन का परामर्श वाला चरण है: विनियामक मसौदा प्रकाशित करता है, हितधारक जवाब देते हैं, और केवल अंतिम दस्तावेज़ ही बाध्यकारी होता है। मसौदे और अंतिम दस्तावेज़ का यही अंतर दिन की ख़बरों में बार-बार दिखता है, TRAI के दिशानिर्देशों से लेकर अदालतों में मध्यस्थता तक।
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प्रश्नपत्रों से जुड़ाव: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, AI और उसका शासन; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2, सांविधिक और विनियामक निकाय (TRAI)।
मुख्य परीक्षा के प्रमुख शब्द: ज़िम्मेदार AI, सिद्धांत-आधारित विनियमन, परामर्शी नियम-निर्माण, क्षेत्र-विशेष दिशानिर्देश।
सामान्य भूल: ‘संयम पर नवाचार को वरीयता’ (Innovation over Restraint) को उलट देना, या परामर्श के मसौदे को लागू करने योग्य नियम मान लेना।
परीक्षा सुझाव: सातों सूत्र क्रम से याद करें; पहला है ‘विश्वास ही आधार है’।
साक्षात्कार का कोण: क्या भारत को AI का विनियमन क्षेत्र-दर-क्षेत्र करना चाहिए, जैसा TRAI दूरसंचार के लिए प्रस्तावित कर रहा है, या एक समग्र क़ानून के ज़रिए?
प्रश्न 8 / 10
1. नटराज की प्रतिमा चार भुजाओं वाली है और आनंद तांडव मुद्रा में है।
2. शिवगामी की प्रतिमा दो भुजाओं वाली है और त्रिभंग मुद्रा में है।
3. जिस उत्खनन में ये मिलीं, उसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कर रहा है।
4. भौतिक संरचना, प्रतिमा-विज्ञान, आभूषणों और पीठिकाओं के आधार पर इन प्रतिमाओं को लगभग 12वीं शताब्दी ईस्वी का माना गया है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
तथ्य: कथन 1 सही है: नटराज आनंद तांडव मुद्रा में हैं, चार भुजाओं वाले; प्रतिमा 110 सेमी ऊँची और 100 सेमी चौड़ी है।
कथन 2 सही है: शिवगामी त्रिभंग मुद्रा में हैं, दो भुजाओं वाली; प्रतिमा 82 सेमी ऊँची और 23 सेमी चौड़ी है।
कथन 3 गलत है: उत्खनन तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) कर रहा है, जो एक राज्य निकाय है, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) नहीं।
कथन 4 सही है: एक मीटर की गहराई पर अपनी पीठिकाओं के साथ मिली इन प्रतिमाओं को उनकी भौतिक संरचना, प्रतिमा-विज्ञान, आभूषणों और पीठिकाओं के आधार पर चोल काल, लगभग 12वीं शताब्दी ईस्वी, का माना गया है।
विश्लेषण: यहाँ काल-निर्धारण शैली और रूप पर टिका है; जब किसी कृति पर अपनी कोई तिथि अंकित न हो, तब कला इतिहासकार यही तरीका अपनाते हैं।
अवधारणा नोट
The Hindu की ख़बर के अनुसार नागपट्टिनम में मिली प्रतिमाएँ भगवान नटराज और देवी शिवगामी की कांस्य मिश्रधातु की प्रतिमाएँ हैं, जो तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग के चल रहे उत्खनन में अपनी पीठिकाओं के साथ निकलीं। नृत्य के स्वामी के रूप में शिव, यानी नटराज, यहाँ चार भुजाओं के साथ आनंद तांडव मुद्रा में दिखाए गए हैं; उनकी सहचरी शिवगामी दो भुजाओं के साथ त्रिभंग मुद्रा में खड़ी हैं। दोनों को चोल काल का माना गया है और उनकी भौतिक संरचना, प्रतिमा-विज्ञान, आभूषणों और पीठिकाओं के साक्ष्य के आधार पर 12वीं शताब्दी ईस्वी का आँका गया है। परीक्षा में ऐसे प्रश्नों के लिए तीन आदतें काम आती हैं: मुद्रा के नाम को उस देवता से जोड़ें जिसका वह वर्णन करती है, देखें कि उत्खनन किसने किया (राज्य पुरातत्व विभाग या ASI), और समझें कि तिथि कैसे तय हुई, यहाँ किसी अभिलेख या दस्तावेज़ से नहीं, बल्कि प्रतिमा-विज्ञान और शैली से। इस तरह की कांस्य प्रतिमाएँ चोल कला की सबसे प्रसिद्ध उपलब्धियों में गिनी जाती हैं।
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प्रश्नपत्रों से जुड़ाव: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1, प्राचीन से आधुनिक काल तक भारतीय कला के रूप और संस्कृति; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1, विरासत संरक्षण।
मुख्य परीक्षा के प्रमुख शब्द: चोल कांस्य प्रतिमाएँ, प्रतिमा-विज्ञान, शैलीगत काल-निर्धारण, राज्य पुरातत्व विभाग।
सामान्य भूल: हर उत्खनन का श्रेय ASI को देना; TNSDA जैसे राज्य पुरातत्व विभाग अपने उत्खनन ख़ुद करते हैं।
परीक्षा सुझाव: मुद्राओं को आकृतियों से जोड़ें: नटराज आनंद तांडव में, शिवगामी त्रिभंग में।
साक्षात्कार का कोण: उत्खनन में मिली मंदिर की कांस्य प्रतिमाएँ खोज-स्थल के पास के स्थानीय संग्रहालय में रहें या राष्ट्रीय संग्रह में जाएँ?
प्रश्न 9 / 10
चर्चित स्थान : राज्य
1. नामसाई : अरुणाचल प्रदेश
2. जोशीमठ : उत्तराखंड
3. धुलियान : पश्चिम बंगाल
4. नागपट्टिनम : तमिलनाडु
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
तथ्य: युग्म 1 सही सुमेलित है: नामसाई, तवांग और बोमडिला के साथ, अरुणाचल प्रदेश के उन तीन स्थलों में है जहाँ 31 अक्टूबर से 21 नवंबर 2026 तक भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों (पिपरहवा अवशेष) की प्रदर्शनी हो रही है।
युग्म 2 सही सुमेलित है: बद्रीनाथ से उड़ान भरने वाला एक हेलिकॉप्टर उत्तराखंड के चमोली ज़िले में जोशीमठ के चाई गाँव के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
युग्म 3 सही सुमेलित है: धुलियान पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले में है, जहाँ, समाचार रिपोर्टों के अनुसार, दिन के Indian Express संपादकीय में नामित दो आरोपियों में से एक की पुलिस फ़ायरिंग में मौत हुई।
युग्म 4 सही सुमेलित है: नागपट्टिनम, जहाँ चोल कांस्य प्रतिमाएँ मिलीं, तमिलनाडु में है, और उत्खनन तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग कर रहा है।
विश्लेषण: चारों युग्म सही हैं; मानचित्र वाले प्रश्नों में अंक इस बात के मिलते हैं कि आप हर चर्चित स्थान को सही जगह रख पाएँ, केवल उसका नाम पहचानने के नहीं।
अवधारणा नोट
दिन की ख़बरों के स्थान पूरे भारत में फैले हैं। अरुणाचल प्रदेश में संस्कृति मंत्रालय, राज्य सरकार, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और राष्ट्रीय संग्रहालय के साथ मिलकर, भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी तवांग (1 से 7 नवंबर), बोमडिला (8 से 13 नवंबर) और नामसाई (14 से 20 नवंबर) में आयोजित कर रहा है; अवशेष 21 नवंबर को राष्ट्रीय संग्रहालय लौटेंगे। The Hindu की ख़बर के अनुसार उत्तराखंड में जोशीमठ के पास हुई दुर्घटना में बद्रीनाथ से देहरादून के सहस्त्रधारा हेलिपैड की ओर जा रहे हेलिकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई, और राज्य के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण, उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA), ने संचालक के पूरे बेड़े की उड़ानें रोक दीं। पश्चिम बंगाल में, समाचार रिपोर्टों के अनुसार, गायघाटा (उत्तर 24 परगना) और धुलियान (मुर्शिदाबाद) वे जगहें थीं जहाँ पुलिस फ़ायरिंग में वे दो मौतें हुईं, जिन पर Indian Express का संपादकीय चर्चा करता है। तमिलनाडु में राज्य पुरातत्व विभाग को नागपट्टिनम में नटराज और शिवगामी की कांस्य प्रतिमाएँ मिलीं। ऐसे स्थानों को उनके ज़िलों के साथ एक ख़ाली रूपरेखा मानचित्र पर अंकित करना प्रारंभिक परीक्षा के मानचित्र प्रश्नों की सबसे अच्छी तैयारी है।
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प्रश्नपत्रों से जुड़ाव: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1, भारत का राजनीतिक भूगोल; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1, कला और संस्कृति (बौद्ध अवशेष, चोल कांस्य प्रतिमाएँ); सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3, आपदा प्रबंधन।
मुख्य परीक्षा के प्रमुख शब्द: पर्वतीय विमानन सुरक्षा, बौद्ध विरासत परिपथ, सांस्कृतिक कूटनीति।
सामान्य भूल: नामसाई या बोमडिला को सिक्किम या असम में रखना; दोनों तवांग के साथ अरुणाचल प्रदेश में हैं।
परीक्षा सुझाव: अरुणाचल प्रदेश के मानचित्र पर तवांग, बोमडिला और नामसाई को एक साथ, और उत्तराखंड के मानचित्र पर जोशीमठ, बद्रीनाथ और देहरादून को अंकित करें।
साक्षात्कार का कोण: क्या मौसम की चेतावनी के दौरान पर्वतीय तीर्थों की हेलिकॉप्टर सेवाएँ रोक दी जानी चाहिए, भले ही हेलिपैड पर मौसम साफ़ दिख रहा हो?
प्रश्न 10 / 10
कथन-I: राष्ट्रीय एकता दिवस हर वर्ष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती की स्मृति में मनाया जाता है।
कथन-II: रियासतों को भारत संघ में एकीकृत करने में सरदार वल्लभभाई पटेल की केंद्रीय भूमिका थी।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?
तथ्य: कथन-I सही है: PIB के अनुसार ‘राष्ट्रीय एकता दिवस हर वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती की स्मृति में मनाया जाता है’।
कथन-II सही है: और यह कथन-I की सही व्याख्या करता है। उसी विज्ञप्ति में ‘भारत के लौह पुरुष’ पटेल को ऐसे नेता के रूप में बताया गया है ‘जिन्होंने रियासतों को भारत संघ में एकीकृत करने में केंद्रीय भूमिका निभाई’; इसी वजह से उनकी जयंती राष्ट्रीय एकता के दिवस के रूप में मनाई जाती है।
विश्लेषण: 31 अक्टूबर 2026 को पटेल की 151वीं जयंती है। लुभाने वाला विकल्प (b) है, जिसमें एकीकरण में उनकी भूमिका को एक असंबद्ध तथ्य मान लिया जाता है; जबकि दिवस का नाम ही दोनों को जोड़ता है।
अवधारणा नोट
राष्ट्रीय एकता दिवस 31 अक्टूबर को, सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर, मनाया जाता है; 2026 में 151वीं जयंती है। विधायी विभाग की एक विज्ञप्ति में PIB इस दिवस को राष्ट्र-निर्माण में पटेल की भूमिका से जोड़ता है: उन्होंने ‘रियासतों को भारत संघ में एकीकृत करने में केंद्रीय भूमिका निभाई’, और उन्हें ‘भारत के लौह पुरुष’ के रूप में याद किया जाता है। रियासतों का एकीकरण सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1 के आधुनिक भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता के बाद के सुदृढ़ीकरण का मुख्य विषय है: आज़ादी के समय उपमहाद्वीप का बड़ा हिस्सा रियासती शासकों के अधीन था, और उन क्षेत्रों को संघ में लाना नए राज्य के पहले कामों में से था। इस दिन के आयोजनों में एकता परेड शामिल है; पिछले एक अंक में बताया गया था कि इस साल पुलिस की एक मोटरसाइकिल रैली, ‘Fight Against Drugs’ (नशे के विरुद्ध लड़ाई), उसमें शामिल होगी। परीक्षा के लिए दिवस को व्यक्ति से और व्यक्ति को प्रक्रिया से जोड़ें: एकता दिवस, पटेल, एकीकरण।
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प्रश्नपत्रों से जुड़ाव: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1, स्वतंत्रता के बाद का सुदृढ़ीकरण और रियासतों का एकीकरण; सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 4, नेताओं के जीवन से मिलने वाली सीख।
मुख्य परीक्षा के प्रमुख शब्द: राष्ट्रीय एकीकरण, रियासतें, राष्ट्र-निर्माण, भारत के लौह पुरुष।
सामान्य भूल: राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर, पटेल) को दूसरे नेताओं से जुड़े अन्य राष्ट्रीय दिवसों से मिला देना।
परीक्षा सुझाव: एकता दिवस, 31 अक्टूबर, सरदार पटेल की जयंती; दिवस का नाम रियासतों के एकीकरण की ओर संकेत करता है।
साक्षात्कार का कोण: रियासतों के एकीकरण के सात दशक बाद आज राष्ट्रीय एकता राज्य से क्या अपेक्षा करती है?