🗞️ चर्चा में क्यों भारत सरकार ने विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति (High Level Committee on Banking for Viksit Bharat) गठित की है। वित्त मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को इसकी घोषणा की। समिति के अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त सुरेश एन. पटेल हैं। समिति को भारत के बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा करनी है। उसे ऐसे “संरचनात्मक, संस्थागत, विनियामक और विधायी सुधारों” की सिफ़ारिश भी करनी है, जिनसे विकसित भारत, 2047 के लिए यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, वित्तीय रूप से समावेशी और सुदृढ़ बन सके। समिति का कार्यकाल छह महीने है।

यह समीक्षा है, सुधार नहीं। समिति ने अभी कोई सिफ़ारिश नहीं की है। उसके पास फ़िलहाल एक कार्यादेश है, जिसका दायरा विवेकपूर्ण मानदंडों और बैंक क़ानूनों से लेकर पूंजी की लागत, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समावेशन के उन दो साधनों तक जाता है जो दशकों पुराने हैं। इसे उन सवालों की सूची समझिए, जिनके जवाब सरकार बैंकिंग में बदलाव के अगले दौर से पहले चाहती है।

समिति का स्वरूप

भूमिका नाम और पद, घोषणा के अनुसार
अध्यक्ष सुरेश एन. पटेल, पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त
सदस्य शिरीष चंद्र मुर्मू, उप गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक
सदस्य पद्मजा चुंदुरु, पूर्व MD और CEO, इंडियन बैंक
सदस्य एन एस विश्वनाथन, पूर्व उप गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक
सदस्य सचिव संयुक्त सचिव (बैंकिंग), वित्तीय सेवाएँ विभाग
कार्यकाल छह महीने

विज्ञप्ति में यह नहीं बताया गया है कि छह महीने किस तारीख़ से गिने जाएँगे, और रिपोर्ट सौंपने की कोई तारीख़ भी तय नहीं की गई है।

बजट प्रस्ताव से समिति तक

इस समिति की जड़ केंद्रीय बजट 2026-27 में है, जो 1 फ़रवरी 2026 को पेश हुआ था। केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण के पैराग्राफ़ 42 में कहा था: “मैं ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति’ गठित करने का प्रस्ताव करती हूँ, ताकि वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को सुरक्षित रखते हुए इस क्षेत्र की व्यापक समीक्षा की जा सके और इसे भारत की वृद्धि के अगले चरण के अनुरूप बनाया जा सके।”

इसकी वजह उन्होंने इससे ठीक पहले वाले पैराग्राफ़ में बताई थी। उनके मुताबिक़ भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की पहचान “मज़बूत बैलेंस शीट, लाभप्रदता के ऐतिहासिक उच्च स्तर, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और देश के 98% से अधिक गाँवों तक पहुँच” है। इसलिए यह क्षेत्र “सुधार-आधारित वृद्धि की राह पर आगे बढ़ते रहने के लिए ज़रूरी उपायों का भविष्योन्मुखी आकलन करने की अच्छी स्थिति में” है।

फ़रवरी का प्रस्ताव और अक्टूबर की समिति, दो अलग घटनाएँ हैं। बजट ने विचार की घोषणा की थी, जबकि 30 अक्टूबर की विज्ञप्ति बताती है कि समिति अब गठित हो चुकी है।

सात विचारार्थ विषय

संरचना

विकसित भारत के लिए बैंकिंग समिति का अधिदेश

समिति कैसे बनी, इसमें कौन है और इसे किन विचारार्थ विषयों की समीक्षा करनी है।

प्रस्तावित बजट भाषण 2026-27, 1 फ़रवरी 2026, पैरा 42 गठित वित्त मंत्रालय की 30 अक्टूबर 2026 की घोषणा के अनुसार अध्यक्ष: सुरेश एन. पटेल पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त; तीन सदस्य; सदस्य सचिव: संयुक्त सचिव (बैंकिंग), DFS; कार्यकाल छह माह मानदंड और क़ानून विवेकपूर्ण मानदंड, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ; RRB और सहकारी बैंकों सहित ढाँचे पूँजी DFI और NBFC सहित दीर्घकालिक ज़रूरतें; पूँजी की लागत, निजी निवेश प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन AI और डिजिटल नवाचार; साइबर सुरक्षा उपाय; प्रतिभा समावेशन प्राथमिकता क्षेत्र ऋण ढाँचा; अग्रणी बैंक योजना इनकी समीक्षा करेगी लक्ष्य: विकसित भारत, 2047 वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी, वित्तीय रूप से समावेशी और सुदृढ़ बैंकिंग
बजट प्रस्ताव से छह माह की समीक्षा तक: समिति के सात विचारार्थ विषयों में से छह चार समूहों में आते हैं, और सबका लक्ष्य विकसित भारत, 2047 है। समिति ने अभी तक कोई सिफ़ारिश नहीं की है।
# समिति को... संक्षेप में
1 “मौजूदा बैंकिंग प्रथाओं और विवेकपूर्ण मानदंडों का आकलन करना, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान करना और उन्हें भारतीय बैंकिंग प्रणाली के लिए उपयुक्त रूप से ढालना” है, साथ ही “वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंकों” का रोडमैप देना है मानदंड और वैश्विक प्रथाएँ
2 “क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों सहित बैंकों के मौजूदा विनियामक और विधिक ढाँचों की समीक्षा करना” है, और दक्षता तथा बैंकिंग में सुगमता के लिए सुधार सुझाने हैं क़ानून और विनियमन
3 “विकास वित्तीय संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों सहित बैंकों की दीर्घकालिक पूंजी ज़रूरतों” का आकलन करना है, और धन के स्रोतों पर सिफ़ारिशें देनी हैं पूंजी की ज़रूरतें
4 “व्यवसायों के लिए पूंजी की लागत में अंतर की जाँच करनी है, और सतत वृद्धि के लिए निजी निवेश बढ़ाने के नीतिगत विकल्प सुझाने हैं” पूंजी की लागत
5 “बैंकिंग संस्थानों में AI और डिजिटल नवाचार का रोडमैप तैयार करना” है, जिसमें साइबर जोखिमों से बचाव के उपाय हों, और प्रतिभा अर्जन तथा क्षमता निर्माण की रणनीति बनानी है प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन
6 ऋण वितरण और वित्तीय समावेशन के संदर्भ में “प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार ढाँचे और अग्रणी बैंक योजना की समीक्षा करनी है, ताकि उनकी प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और समन्वय का आकलन हो सके” समावेशन के साधन
7 “भारत सरकार द्वारा समिति को सौंपे गए किसी भी अन्य विषय पर सिफ़ारिशें देनी हैं” शेष विषय

दो बातें ध्यान खींचती हैं। पहली, समिति का दायरा वाणिज्यिक बैंकों से आगे जाकर RRB, सहकारी बैंकों, विकास वित्तीय संस्थानों (DFI) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) तक फैला है। दूसरी, चौथा विषय सिर्फ़ बैंकों का नहीं, पूरी अर्थव्यवस्था का है: व्यवसायों के लिए पूंजी की लागत अलग-अलग क्यों होती है, और निजी निवेश कैसे बढ़ाया जाए।

समीक्षा के दायरे में दो साधन: प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार और अग्रणी बैंक योजना

प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार (PSL) के तहत बैंकों को अपने ऋण का एक तय हिस्सा कृषि और सूक्ष्म उद्यम जैसे क्षेत्रों को देना होता है। संदर्भ के लिए: RBI के मौजूदा मास्टर निदेश 24 मार्च 2025 के हैं और 1 अप्रैल 2025 से लागू हुए (11 सितंबर 2026 तक अद्यतन)। लक्ष्य समायोजित निवल बैंक ऋण (ANBC) या तुलनपत्रेतर एक्सपोज़र के ऋण समतुल्य (CEOBSE), इन दोनों में जो भी अधिक हो, उसके हिस्से के रूप में तय होते हैं:

ऋणदाता लक्ष्य
घरेलू वाणिज्यिक बैंक (RRB और लघु वित्त बैंकों को छोड़कर) और 20 या उससे अधिक शाखाओं वाले विदेशी बैंक कुल प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र 40%
इसके भीतर, इन्हीं बैंकों के लिए कृषि 18% (गैर-कॉर्पोरेट किसानों के लिए 14%, जिसमें से 10% लघु और सीमांत किसानों के लिए); सूक्ष्म उद्यम 7.5%; कमज़ोर वर्ग 12%
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 75%
शहरी सहकारी बैंक 60%

अग्रणी बैंक योजना (LBS) RBI ने दिसंबर 1969 में शुरू की थी। इससे पहले अक्टूबर 1969 में गाडगिल अध्ययन दल और नवंबर 1969 में नरीमन समिति ने अपनी रिपोर्ट दी थी। RBI हर ज़िले में एक वाणिज्यिक बैंक को अग्रणी बैंक नामित करता है। यह बैंक बैंकों, सरकार, NABARD और अन्य संस्थाओं के बीच तालमेल बिठाता है, ताकि ऋण प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्रों तक पहुँचे। योजना तीन स्तरों पर काम करती है: सबसे नीचे ब्लॉक स्तरीय बैंकर्स समिति, बीच में ज़िला परामर्शदात्री समिति और ज़िला स्तरीय समीक्षा समिति, और शीर्ष पर राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) या केंद्रशासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समिति। 2025 का मास्टर परिपत्र आँकड़ों में इसकी तस्वीर देता है: 31 मार्च 2025 को सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंक और निजी क्षेत्र के दो बैंक (जम्मू एंड कश्मीर बैंक और ICICI बैंक) 782 ज़िलों में अग्रणी बैंक थे।

यहाँ हाल की पृष्ठभूमि अहम है। RBI ने व्यापक समीक्षा के बाद 19 जून 2026 को अग्रणी बैंक योजना के संशोधित दिशानिर्देश जारी किए, जिन्होंने पहले के सभी निर्देशों की जगह ले ली। यानी समिति एक ऐसी योजना का आकलन करेगी, जिसे RBI ने अभी-अभी नए सिरे से लिखा है।

मुख्य परीक्षा की दृष्टि से: पूरे क्षेत्र की समीक्षा में किन बातों का संतुलन ज़रूरी है

  • स्थिरता के साथ वृद्धि: बजट ने इस समीक्षा को तीन सुरक्षा-उपायों के इर्द-गिर्द रखा था: वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण। “वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंकों” की कोशिश में इनमें से कोई भी कमज़ोर नहीं पड़ना चाहिए।
  • बड़ा दायरा: RBI ने पी.जे. नायक की अध्यक्षता वाली जिस समिति की रिपोर्ट 13 मई 2014 को अपनी वेबसाइट पर डाली थी, उसने बैंक बोर्डों के शासन पर विचार किया था। यह समिति RRB, सहकारी बैंकों, DFI और NBFC समेत पूरे क्षेत्र को अपने दायरे में लेती है।
  • निर्देशित ऋण के पुराने साधन: अग्रणी बैंक योजना 1969 की है, और PSL नियम के ज़रिए उधार के हिस्से तय करता है। सवाल यह है कि क्या ये साधन आज भी ऐसा ऋण पहुँचा पा रहे हैं जो “समावेशी, संतुलित और डेटा-आधारित” हो, जैसा कि विचारार्थ विषयों में कहा गया है।
  • प्रौद्योगिकी और जोखिम साथ-साथ: AI और डिजिटल बैंकिंग के साथ साइबर सुरक्षा-उपायों और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल की बात भी जुड़ी है; इसके साथ वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद की साइबर सुरक्षा रणनीति (अंग्रेज़ी) (23 अक्टूबर) पढ़ें।
  • संरचना: समिति में एक पूर्व सतर्कता प्रमुख, RBI के एक वर्तमान और एक पूर्व उप गवर्नर, और इंडियन बैंक के एक पूर्व MD और CEO शामिल हैं। वित्तीय सेवाएँ विभाग के संयुक्त सचिव (बैंकिंग) इसके सदस्य सचिव हैं।

आगे क्या: समिति का कार्यकाल छह महीने का है। उसकी सिफ़ारिशें सरकार के पास जाएँगी, और वह कोई विधायी सुधार प्रस्तावित करती है तो उसके लिए संसद की मंज़ूरी फिर भी ज़रूरी होगी। जिस क़ानून पर वह दोबारा विचार कर सकती है, उसकी पृष्ठभूमि के लिए देखें यस बैंक AT-1 वाले लेख में बैंककारी विनियमन अधिनियम की पृष्ठभूमि (अंग्रेज़ी) (17 अक्टूबर) और IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री (अंग्रेज़ी) (14 अक्टूबर, पृष्ठभूमि); ग्रामीण ऋण के संदर्भ के लिए ग्रामीण समृद्धि के वित्तपोषण (अंग्रेज़ी) पर संपादकीय (1 अक्टूबर)।

UPSC प्रासंगिकता

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा संसाधनों को जुटाने, प्रगति और विकास से संबंधित विषय; समावेशी वृद्धि; बैंकिंग क्षेत्र के सुधार।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप; सांविधिक और विनियामक निकाय (RBI)।

प्रारंभिक परीक्षा: समिति के अध्यक्ष, सदस्य और कार्यकाल; PSL के लक्ष्य; अग्रणी बैंक योजना (1969, तीन स्तर, 2026 में संशोधित); बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949; प्रादेशिक ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 और RRB का स्वामित्व।

मुख्य परीक्षा: “भारत के बैंक हाल के किसी भी दौर से ज़्यादा मज़बूत हैं, फिर भी सरकार ने पूरे क्षेत्र की समीक्षा के लिए एक समिति गठित की है। प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार, अग्रणी बैंक योजना तथा सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के विनियमन के संदर्भ में ऐसी समीक्षा के पक्ष में तर्कों की विवेचना कीजिए।” (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3, 250 शब्द)

📌 तथ्य सार: ज्ञानकोश

प्रारंभिक परीक्षा: कथन-आधारित तथ्य:

  • विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति: गठित; वित्त मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को इसकी घोषणा की
  • अध्यक्ष: सुरेश एन. पटेल, पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त; कार्यकाल छह महीने
  • सदस्य: शिरीष चंद्र मुर्मू (उप गवर्नर, RBI), पद्मजा चुंदुरु (पूर्व MD और CEO, इंडियन बैंक), एन एस विश्वनाथन (पूर्व उप गवर्नर, RBI)
  • सदस्य सचिव: संयुक्त सचिव (बैंकिंग), वित्तीय सेवाएँ विभाग
  • बजट भाषण 2026-27 (1 फ़रवरी 2026) के पैराग्राफ़ 42 में प्रस्तावित
  • PSL: घरेलू वाणिज्यिक बैंकों के लिए ANBC या CEOBSE का 40%; कृषि 18%, सूक्ष्म उद्यम 7.5%, कमज़ोर वर्ग 12%
  • PSL लक्ष्य: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 75%; शहरी सहकारी बैंक 60%
  • अग्रणी बैंक योजना: RBI ने दिसंबर 1969 में शुरू की; संशोधित दिशानिर्देश 19 जून 2026 को जारी
  • RRB की शेयर पूंजी: केंद्र 50%, राज्य सरकार 15%, प्रायोजक बैंक 35% (प्रादेशिक ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976)

प्रारंभिक परीक्षा: संभावित भ्रामक बिंदु:

  • मुर्मू RBI के वर्तमान उप गवर्नर हैं; विश्वनाथन पूर्व उप गवर्नर हैं
  • प्रस्ताव और गठन एक बात नहीं: बजट ने 1 फ़रवरी को समिति का प्रस्ताव रखा था; गठन अक्टूबर में हुआ
  • समिति ने कोई सिफ़ारिश नहीं की है; उसे समीक्षा करनी है और सुझाव देने हैं
  • नायक समिति (RBI ने रिपोर्ट 13 मई 2014 को वेबसाइट पर डाली) ने बैंक बोर्डों के शासन की समीक्षा की थी, पूरे क्षेत्र की नहीं
  • अग्रणी बैंक योजना के स्तर: BLBC (ब्लॉक), DCC और DLRC (ज़िला), SLBC या UTLBC (राज्य या केंद्रशासित प्रदेश)

मुख्य परीक्षा: तर्क और प्रमुख शब्दावली:

  • प्रमुख शब्द: वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंक, विवेकपूर्ण मानदंड, पूंजी की लागत, निर्देशित ऋण, वित्तीय समावेशन, साइबर सुदृढ़ता, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल
  • संतुलन: एक ओर प्रतिस्पर्धा और निजी निवेश, दूसरी ओर वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण

साक्षात्कार: इनके लिए तैयार रहें:

  • “बैंक मुनाफ़े में हैं। फिर अभी समीक्षा क्यों?” मज़बूती की स्थिति से: बजट का तर्क था कि मज़बूत बैलेंस शीट की वजह से यही सुधार के अगले चरण की योजना बनाने का सही समय है।

स्रोत: Press Information Bureau, Ministry of Finance, “High Level Committee on Banking for Viksit Bharat” विज्ञप्ति, 30 अक्टूबर 2026 (PRID 2330598)। पृष्ठभूमि: Union Budget 2026-27, Budget Speech, 1 फ़रवरी 2026, पैराग्राफ़ 41 और 42। Reserve Bank of India, Master Direction on Priority Sector Lending, पृष्ठभूमि (RBI/FIDD/2024-25/128, 24 मार्च 2025, 11 सितंबर 2026 तक अद्यतन)। RBI पृष्ठभूमि: संशोधित अग्रणी बैंक योजना पर परिपत्र (RBI/2026-27/150, 19 जून 2026) और उसी तारीख़ की प्रेस विज्ञप्ति; Master Circular on the Lead Bank Scheme (RBI/2025-26/04, 1 अप्रैल 2025)। The Banking Regulation Act, 1949। The Regional Rural Banks Act, 1976। नायक समिति की रिपोर्ट पर RBI की प्रेस विज्ञप्ति, 13 मई 2014।

  • टिप्पणी: उद्धरण-चिह्नों में दिए गए विधिक और आधिकारिक अंश अंग्रेज़ी पाठ के हिंदी अनुवाद हैं।