🗞️ चर्चा में क्यों भारत के पहले आम चुनाव के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की Report on the First General Elections in India 1951-52 (भारत में पहले आम चुनावों पर रिपोर्ट) के अनुसार, मतदान 25 अक्टूबर 1951 को हिमाचल प्रदेश के चीनी और पांगी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में आरंभ हुआ था। इन दोनों पहाड़ी निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे पहले मतदान इसलिए हुआ ताकि वहाँ नवंबर के आरंभ में सामान्यतः होने वाली बर्फ़बारी से पहले मतदान पूरा हो सके; अंतिम मतदान उत्तर प्रदेश में 21 फ़रवरी 1952 को समाप्त हुआ।

आयोग की अपनी रिपोर्ट, जो 1955 में मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्तावना के साथ प्रकाशित हुई, इस बात का प्राथमिक अभिलेख है कि पहला चुनाव कैसे संपन्न कराया गया, और नीचे दिए गए आँकड़े इसी से लिए गए हैं। बाद के विवरणों में 1951-52 के आँकड़े हमेशा इससे मेल नहीं खाते, इसलिए उद्धरण इसी का दिया जाना चाहिए।

तंत्र का निर्माण, 1949 से 1951

निर्वाचन आयोग की स्थापना करने वाला अनुच्छेद 324 26 नवंबर 1949 को ही लागू कर दिया गया था, अर्थात् शेष संविधान से पहले, जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। निर्वाचन आयोग का कार्यालय 25 जनवरी 1950 को स्थापित हुआ, और सुकुमार सेन, आई.सी.एस., ने 21 मार्च 1950 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यभार ग्रहण किया। इन चुनावों के लिए आयोग में केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ही थे: 1955 में लिखी गई रिपोर्ट बताती है कि तब तक कोई अन्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त नहीं किया गया था।

संसद ने दो चरणों में विधान बनाया। अधिक तात्कालिक प्रावधान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में रखे गए, जो मुख्य रूप से निर्वाचक नामावली तैयार करने और उसके प्रकाशन तथा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित था। निर्वाचनों का वास्तविक संचालन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 पर छोड़ा गया, जो, रिपोर्ट के अनुसार, मतदान आरंभ होने से कुछ ही महीने पहले, जुलाई 1951 में जाकर अधिनियमित हुआ।

फिर बारी आई मतदाताओं की। रिपोर्ट ने 1951 में 21 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को वयस्क माना, जो उस समय मतदान की आयु थी। इसमें जम्मू और कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में 17,32,13,635 पंजीकृत मतदाता दर्ज किए गए, जिनमें लगभग 45 प्रतिशत महिलाएँ थीं: यह 1951 की जनगणना में गिनी गई 35,66,91,760 की जनसंख्या का 49 प्रतिशत था।

चीनी और पांगी से पहली लोक सभा तक

पहली अधिसूचनाएँ 10 सितंबर 1951 को हिमाचल प्रदेश के लिए जारी की गईं। चीनी और पांगी निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे पहले, 25, 27, 29 और 31 अक्टूबर तथा 2 नवंबर 1951 को मतदान हुआ, क्योंकि वहाँ नवंबर के आरंभ की बर्फ़बारी से पहले मतदान पूरा करना आवश्यक था। पूरे हिमाचल प्रदेश में मतदान 37 दिनों में फैला रहा, जिनमें वास्तविक मतदान केवल 17 दिन हुआ। संसदीय और विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों का मतदान फ़रवरी 1952 में उत्तर प्रदेश के चुनाव पूरे होने के साथ समाप्त हुआ। जैसा कि द हिंदू ने उल्लेख किया है, कल्पा के स्कूल शिक्षक श्याम सरन नेगी को स्वतंत्र भारत का पहला मतदाता माना जाता है।

कालरेखा

भारत का पहला आम चुनाव, 1949 से 1952

इसमें: आधारभूत तैयारी, दो अधिनियम, मतदान की अवधि और पहली लोक सभा।

आधारभूत तैयारी, 1949 से 1950 अनुच्छेद 324 लागू: 26 नवंबर 1949 निर्वाचन आयोग का कार्यालय स्थापित: 25 जनवरी 1950 मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन का कार्यभार ग्रहण: 21 मार्च 1950 RPA 1950 निर्वाचक नामावली और निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन RPA 1951 निर्वाचनों का वास्तविक संचालन; जुलाई 1951 में जाकर अधिनियमित विधान, दो चरणों में 10 सितंबर 1951 पहली अधिसूचनाएँ जारी, हिमाचल प्रदेश के लिए 25 अक्टूबर 1951: मतदान आरंभ चीनी और पांगी, हिमाचल प्रदेश, नवंबर के आरंभ की बर्फ़बारी से पहले मतदान 21 फ़रवरी 1952 उत्तर प्रदेश के चुनाव पूरे होने के साथ मतदान समाप्त 17 अप्रैल 1952 पहली बार लोक सभा का विधिवत गठन 4 जून 1952 पश्चिम बंगाल विधान परिषद के चुनाव के साथ कार्यक्रम समाप्त पहला सदन
आधारभूत तैयारी से पहली लोक सभा तक पहला आम चुनाव, जैसा निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट में दर्ज है: मतदान 25 अक्टूबर 1951 को हिमाचल प्रदेश के दो निर्वाचन क्षेत्रों में आरंभ हुआ।

लोक सभा (House of the People) के लिए निर्वाचित और नामनिर्देशित सदस्यों के नामों वाली अधिसूचना 2 अप्रैल 1952 को जारी हुई। 17 अप्रैल 1952 को पहली बार लोक सभा का विधिवत गठन हुआ, इसका पहला सत्र 13 मई 1952 को आरंभ हुआ, और जी.वी. मावलंकर इसके पहले अध्यक्ष थे (15 मई 1952 से 27 फ़रवरी 1956 तक)। पहली अधिसूचनाओं से लेकर 4 जून 1952 को पूरे हुए पश्चिम बंगाल विधान परिषद के चुनाव तक, पूरा कार्यक्रम आठ महीने से अधिक चला। आयोग की पुस्तक Leap of Faith में 1951-52 के चुनाव में लगे 120 दिनों की तुलना अगले आम चुनाव के 19 दिनों से की गई है, जो हिमाचल प्रदेश और पंजाब की पहाड़ियों के कुछ बर्फ़ से ढके निर्वाचन क्षेत्रों को छोड़कर हर जगह 24 फ़रवरी 1957 से 14 मार्च 1957 के बीच हुआ था।

पैमाना: सीटें, निर्वाचन क्षेत्र और बूथ

मद 1951-52
लोक सभा में सीटें 497 आवंटित; 489 प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से, वयस्क मताधिकार द्वारा, प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरी गईं
नामनिर्देशन से भरी गई सीटें 8 सीटें (जम्मू और कश्मीर, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, तथा असम के भाग ख जनजातीय क्षेत्र) राष्ट्रपति द्वारा नामनिर्देशित व्यक्तियों से भरी गईं, साथ ही अनुच्छेद 331 के अंतर्गत 2 आंग्ल-भारतीय (यह नामनिर्देशन जनवरी 2020 में समाप्त हो गया, जब 104वें संशोधन ने इसकी अवधि नहीं बढ़ाई): इस प्रकार 499 सदस्यों का सदन
संसदीय निर्वाचन क्षेत्र 314 एक-सदस्यीय, 86 दो-सदस्यीय और 1 तीन-सदस्यीय
आरक्षित सीटें 72 अनुसूचित जातियों के लिए, 26 अनुसूचित जनजातियों के लिए
राज्य विधान सभा सीटें लगभग 3,283
मतदान केंद्र 1,32,560, जिनमें 1,96,084 मतदान बूथ थे

आरक्षित सीटें अधिकतर बहु-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों के माध्यम से समायोजित की गईं। उत्तर बंगाल (North Bengal) एकमात्र तीन-सदस्यीय संसदीय निर्वाचन क्षेत्र था, जिसमें एक सीट अनुसूचित जाति के और एक अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित थी; अनुसूचित जातियों की शेष 71 सीटें दो-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों में थीं, और कोई भी एक-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं था। अनुसूचित जनजातियों की शेष 25 सीटों में से 15 दो-सदस्यीय और 10 एक-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों में थीं।

मतदाता मतपत्र पर कोई निशान नहीं लगाते थे। आयोग ने हर उम्मीदवार के लिए अलग मतपेटी रखी, और हर पेटी पर अलग चिह्न था; मतपत्र “मात्र एक टोकन था, जिस पर मतदाता को कोई निशान नहीं लगाना होता था”। संसदीय और विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान एक ही प्रक्रिया में हुआ, यह बात एक राष्ट्र, एक चुनाव (अंग्रेज़ी) की बहस से जोड़कर देखनी चाहिए; निर्वाचन क्षेत्र कैसे निर्धारित होते हैं, यह जानने के लिए परिसीमन आयोग (अंग्रेज़ी) देखें।

जनादेश: मतदान प्रतिशत और परिणाम

नामावली में दर्ज 17,32,13,635 मतदाताओं में से 8,86,12,171 ने संसद के चुनावों में वोट डाला, जिसे रिपोर्ट 51.15 प्रतिशत का समग्र मतदान बताती है। बाद के कुछ विवरणों में मतदान प्रतिशत का आँकड़ा इससे कम दिया गया है; रिपोर्ट का आँकड़ा पंजीकृत मतदाताओं के आधार पर निकाला गया है।

दल (लोक सभा) लड़ी गई सीटें जीती गई सीटें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 472 364
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 49 16
सोशलिस्ट पार्टी 256 12
किसान मज़दूर प्रजा पार्टी 145 9
भारतीय जनसंघ 93 3

कांग्रेस ने 489 निर्वाचित सीटों में से 364 सीटें जीतीं; सूची में दिए गए दलों में उसके बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी रही, 16 सीटों के साथ।

मुख्य परीक्षा की दृष्टि से: 1951-52 ने क्या गढ़ा

  • बड़े पैमाने पर वयस्क मताधिकार: नए संविधान के वयस्क मताधिकार के अंतर्गत 17 करोड़ से अधिक वयस्क पंजीकृत हुए, जिनमें लगभग 45 प्रतिशत महिलाएँ थीं, और यह उस समय हुआ जब मतदान की आयु 21 वर्ष थी।
  • कुछ महीनों में खड़ी हुई संस्था: आयोग का कार्यालय जनवरी 1950 में खुला, और चुनाव संचालन का अधिनियम जुलाई 1951 में जाकर बना; मतदान उसी वर्ष अक्टूबर में आरंभ हो गया। हर उम्मीदवार के लिए अलग पेटी और अलग चिह्न, तथा पहाड़ों में बर्फ़बारी से पहले कराया गया मतदान दिखाते हैं कि प्रशासन ने स्वयं को अपने मतदाताओं और अपने भू-भाग के अनुरूप ढाला।
  • ढाँचे में ही प्रतिनिधित्व: अनुसूचित जातियों की 72 सीटें दो-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों और एकमात्र तीन-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र के माध्यम से, तथा अनुसूचित जनजातियों की 26 सीटें एक-सदस्यीय, दो-सदस्यीय और तीन-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों के माध्यम से समायोजित की गईं; 8 सीटें नामनिर्देशन से भरी गईं।
  • तब और अब: मतदान की आयु 21 से घटकर 18 वर्ष हो गई है (इकसठवाँ संशोधन); पहला आयोग केवल एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त था; और आयोग की अपनी गणना के अनुसार, जिस चुनाव में 1951-52 में 120 दिन लगे थे, वह 1957 में कुछ बर्फ़ से ढके पहाड़ी निर्वाचन क्षेत्रों को छोड़कर 19 दिनों में हुआ।
  • स्थायी ढाँचा: अनुच्छेद 324, 326 और 327, तथा 1950 और 1951 के दोनों लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, आज भी भारत के चुनावों का विधिक आधार हैं।

UPSC प्रासंगिकता

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ; संवैधानिक निकायों (निर्वाचन आयोग) की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1: स्वतंत्रता के पश्चात देश के अंदर एकीकरण और पुनर्गठन।

प्रारंभिक परीक्षा: अनुच्छेद 324, 326, 327 और 331; RPA 1950 और RPA 1951; पहले मतदान का दिन और पहली लोक सभा; 1951-52 में सीटें और आरक्षण; पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त और लोक सभा के पहले अध्यक्ष; राष्ट्रीय मतदाता दिवस।

मुख्य परीक्षा: “संविधान, दोनों लोक प्रतिनिधित्व अधिनियमों और निर्वाचन आयोग ने 1951-52 के भारत के पहले आम चुनाव में वयस्क मताधिकार को किस प्रकार व्यावहारिक बनाया? आज के निर्वाचन प्रशासन के लिए उस प्रक्रिया से क्या सीख मिलती है?” (GS2, 250 शब्द)

📌 तथ्य सार: ज्ञानकोश

प्रारंभिक परीक्षा: कथन-आधारित तथ्य:

  • पहला आम चुनाव: मतदान 25 अक्टूबर 1951 को हिमाचल प्रदेश के चीनी और पांगी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में आरंभ हुआ (ECI रिपोर्ट)
  • मतदान 21 फ़रवरी 1952 को उत्तर प्रदेश में समाप्त हुआ; पूरा कार्यक्रम 10 सितंबर 1951 से 4 जून 1952 तक चला
  • पहली लोक सभा: 17 अप्रैल 1952 को विधिवत गठित; पहला सत्र 13 मई 1952 से; पहले अध्यक्ष जी.वी. मावलंकर
  • लोक सभा: 489 सीटें प्रत्यक्ष निर्वाचन से; 8 नामनिर्देशित सीटों और 2 आंग्ल-भारतीयों (अनुच्छेद 331) को मिलाकर कुल 499
  • आरक्षित सीटें: 72 अनुसूचित जाति (SC), 26 अनुसूचित जनजाति (ST); उत्तर बंगाल एकमात्र तीन-सदस्यीय संसदीय निर्वाचन क्षेत्र था
  • मतदाता: 17,32,13,635 (जम्मू और कश्मीर को छोड़कर), लगभग 45 प्रतिशत महिलाएँ; डाले गए वोट 8,86,12,171; मतदान 51.15 प्रतिशत (ECI रिपोर्ट)
  • 1,32,560 मतदान केंद्र, जिनमें 1,96,084 मतदान बूथ; हर उम्मीदवार के लिए अलग मतपेटी
  • अनुच्छेद 324 लागू: 26 नवंबर 1949; ECI का कार्यालय स्थापित: 25 जनवरी 1950; मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुकुमार सेन ने कार्यभार ग्रहण किया: 21 मार्च 1950
  • राष्ट्रीय मतदाता दिवस: 25 जनवरी, 2011 से मनाया जाता है, ECI के स्थापना दिवस का प्रतीक

प्रारंभिक परीक्षा: संभावित भ्रामक बिंदु:

  • 25 अक्टूबर 1951 पहले मतदान का दिन है, हिमाचल प्रदेश में; यह न तो परिणामों की तिथि है और न ही पहली लोक सभा (17 अप्रैल 1952) की
  • RPA 1950 निर्वाचक नामावली और परिसीमन से संबंधित है; RPA 1951 निर्वाचनों के संचालन से। इन्हें आपस में न बदलें
  • 1951-52 में मतदान की आयु 21 वर्ष थी; 28 मार्च 1989 से लागू इकसठवें संशोधन के अंतर्गत यह 18 वर्ष हुई
  • अनुच्छेद 324 शेष संविधान (26 जनवरी 1950) से पहले, 26 नवंबर 1949 को लागू हुआ
  • 1951-52 का आयोग अकेले मुख्य निर्वाचन आयुक्त का था, कोई बहु-सदस्यीय निकाय नहीं

मुख्य परीक्षा: तर्क और प्रमुख शब्दावली:

  • प्रमुख शब्दावली: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, संस्था निर्माण, चुनावी शुचिता, आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र, लोक सभा और विधान सभा के एक साथ चुनाव
  • 1951-52 में 120 दिन, जबकि 1957 में 19 दिन (कुछ बर्फ़ से ढकी पहाड़ी सीटों को छोड़कर), ECI की अपनी गणना के अनुसार: पहले चुनाव से मिली प्रशासनिक सीख

साक्षात्कार: इनके लिए तैयार रहें:

  • “क्या 1951 में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार एक जुआ था?” रिकॉर्ड की ओर ध्यान दिलाएँ: 17 करोड़ से अधिक मतदाता, जिनमें लगभग 45 प्रतिशत महिलाएँ, 1.32 लाख मतदान केंद्र, और अप्रैल 1952 तक गठित लोक सभा।

स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, Report on the First General Elections in India 1951-52, Volume I (General), 1955। भारत निर्वाचन आयोग, Leap of Faith (ई-बुक), पृष्ठ 41, 46 और 69, तथा ECI Atlas (ई-बुक), पृष्ठ 104। लोक सभा, Frequently Asked Questions (sansad.in)। भारत का संविधान (मई 2024 का पाठ), अनुच्छेद 324, 326 और 327। पत्र सूचना कार्यालय (PIB), निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस पर विज्ञप्ति (जनवरी 2023)। द हिंदू, 25 अक्टूबर 2026 (मुद्रित संस्करण)।